रोग निवारक पुष्प वाटिका

रोग निवारक पुष्प वाटिका

फूल , पुष्प , कुसुम ,पुहुप , सुमन आदि नामों से पुकारे जाने वाले , पेड़- पौधों के यौवन को प्रगट करने वाले, विधाता की अद्भुत कला के ये बेजोड़ नमूने , सौंदर्य और सुगंध के स्त्रोत , कोमलता के पर्याय , भावनाओं के वाहक तरह-तरह के यह फूल हमारे स्वास्थ्य और सौंदर्य के रक्षक और पोषक है ।

प्रकृति की अनमोल देन ये फूल हमारी चिकित्सा भी करते हैं । यों तो प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत हवा , पानी , सूर्य किरण, रंग , मिट्टी आदि प्राकृतिक उपाधानों का ही प्रयोग होता है । उपवास चिकित्सा , व्यायाम चिकित्सा आदि भी इसी के कई तरीकों में से एक हैं । फूलों द्वारा चिकित्सा मे एरोनाथेरेपी और कलर थेरेपी का ही प्रयोग किया जाता है ।

फूलों के रासायनिक घटक हमारी त्वचा , श्वास नली , स्नायु तंत्र को प्रभावित करते हैं । इसे आधार मानकर हर्बल चिकित्सा पद्धति या जड़ी- बूटियों द्वारा रोग का निवारण कार्य किया जाता है । अपने आस-पास पाए जाने वाले पुष्पों के औषधीय गुणों का परिचय निम्नानुसार है —

गेंदा

गांवों कस्बों और शहरों में पाया जाने वाला पुष्प , जो प्राय: दसहरा से खिलना शुरू होता है , तो चैत्र वैशाख तक खिलता है , कम मेहनत में साधारण भूमि पर उगने वाला यह फूल पीले रंग एवं लाल रंग का होता है । लाल रंग के छोटे फूल बारिष के अलावा हर मौसम में खिलते हैं । गुलदस्ता , हार बनाने में उपयोगी होते हैं । यह फूल चर्मरोग नाशक , सूजन में इसका लेप लाभकारी , पथरी नाशक , फोड़ा फुंसी को शीघ्र ठीक करता है ,मच्छरों को दूर भगाता है ।

गुड़हल

मंदार , जासवंत , घंटाफूल के नाम से जाना जाता है । दुर्गा देवी का प्रिय फूल लाल रंग का होता है । अब तो सफेद ,पीला ,नारंगी कई रंगों का उगाया जाता है । केशरोगी का मित्र ,शीतवर्द्धक , रक्तशोधक ,गर्भनिरोधक ,मुख के छाले दूर करता है ।

जूही

मादक सुगंधित युक्त , अम्ल पित्त नाशक, पेट के छाले दूर करता है। जिसे पेप्टिक अल्सर कहते हैं । इसके निरंतर सानिध्य से क्षयरोग से बचाव होता है ।

चमेली

भीनी-भीनी खुशबू वाला, निद्रादायक , कामोद्दीपक , इसके पत्ते चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं । गरारे करने से टांसिल में लाभदायक, दंतशूल , पायरिया निवारक ।

गुलाब

सौंदर्य , सुगंधि , प्रेम का पर्याय माने जाने वाला यह स्फूर्तिदायी फूल शीतकारी ,स्वादिष्ट , नेत्र रोग में लाभदायक , पुष्टिदायी , पाचक होता है ।

चंपा

मोहक खुशबू वाला श्वेत रक्तवर्णी बड़े वृक्ष में बारहों मास खिलता है । नेत्र ज्योति वर्द्धक ,ज्वरहारी , पंखुड़ियां पीसकर खूजली में लगाया जाता है । श्रृंगार , उबटन में उपयोग किया जाता है ।

मोगरा

इसे बेला मल्लिका पूष्प भी कहा जाता है । गर्मियों में खिलने वाला मोहक ,मादक ,सुगंधियुक्त श्वेतवर्णी फूल स्त्री रोगों के लिए प्रयोग में लाया जाता है ।

पलाश

ढाक ,किंशुक, होली फूल के नाम से जाना जाने वाला बसंत का वाहक , वनों में दहकती आग सा सबको दूर से ही आकर्षित कर लेता है । यह कृमि नाशक , सौंदर्य वर्द्धक है ।

कमल

लक्ष्मी देवी का प्रिय , तालाबों में खिलने वाला श्वेत ,नील, रक्तवर्णी बड़े आकार के फूल वीर्य वर्द्धक , पुष्टिकारी , सौंदर्य वर्द्धक है ।उबटन में उपयोग ,कमल के छत्ते में बना हुआ शहद , नेत्र रोगों में अत्यंत हितकर है ।

हरसिंगार

चेहरे की कांति बढ़ाता है । गठिया निवारक , सौंदर्य वर्धक सुगंधी पूर्ण पुष्प है ।

नीम

चर्म रोग नाशक , संक्रामक रोग नाशक , मोटापा दूर करने वाला सौंदर्य , स्वास्थ्य का रक्षक है ।

बबूल

कफ नाशक , चर्म रोग नाशक , रक्तशोधक , दंतक्षय रोकता है । सिर दर्द में इसका लेप लाभकारी है ।

अनार

मुंह के छाले में इसकी पंखुड़ी चबाने से आराम मिलता है । बच्चों के दस्त में इसकी कलियां पीसकर मिलाने से दस्त ठीक होता है

मेहंदी

निद्रादायक , रक्तशोधक , चर्म रोग नाशक है

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