नवरात्रि को नौ रूपों में देवी की पूजा , 9 दिन , 9 तारीख , 9 वाहन , 9 संकेत , 9 रंग और , 9 मंत्र , 9 भोग और जौ बोने का रहस्य

नवरात्रि को नौ रूपों में देवी की पूजा , 9 दिन , 9 तारीख , 9 वाहन , 9 संकेत , 9 रंग और , 9 मंत्र , 9 भोग और जौ बोने का रहस्य

नवरात्रि में मां देवी दुर्गा को नौ रूपों में पूजा की जाती है । यह त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाता है और देश के सभी हिंदू नागरिक बड़े धूम-धाम से इस देवी कि पूजा करते हैं । यह हिंदुओं का धार्मिक त्यौहार है जो वर्ष में दो बार मनाया जाता है । चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होकर 9 दिनों तक चलता है ।

जौ बोने का धार्मिक महत्व

नवरात्रि की पूजा में जौ बोने का धार्मिक महत्व है इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 शनिवार से शुरू हो रहा है और 25 अक्टूबर तक चलेगा जब जब से कलश स्थापना होती है , तब से इस वर्ष शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा लेकर अंतिम दिन तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है ‌। कलश के अगल-बगल जौ बोया जाता है । यह जौ बोने की परंपरा सदियों से चली आ रही है । इस जौ में ब्रह्म का स्वरूप माना गया है और यह जौ प्रकृति की पहली फसल है । क्योंकि जब प्राचीन काल में हवन किया गया था उस समय आहुति की परंपरा थी । इसलिए जौ को सम्मान करते हुए आज भी पूजा पाठ में जौ का प्रयोग करते हैं ।साथ ही साथ जौ जातक के भविष्य में आने वाली संकेतों के बारे में भी बताती है ।नवरात्रि में जब जौ बोयी जाती है । जब जौ ज्यादा बढ़ती है तब उतना ही मां दुर्गा का आशीर्वाद लोगों पर बरसती है । और व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि भी बनी रहती है ।अगर जौ का अंकुर 2 से 3 दिन में आ जाता है तो शुभ मानते हैं । लेकिन अगर नवरात्रि समाप्ति तक जौ नहीं उगता है , तो अशुभ माना गया है । लेकिन कई बार ऐसा भी देखा जाता है जौ ठीक से नहीं बोया गया है तो वहां पर जौ नहीं उगता है । इसलिए जौ को अच्छी तरह से बोया जाना चाहिए , ताकि जौ अच्छी तरह उग जाय

और जब जौ का ऊपर का आधा हिस्सा हरा हो और नीचे का पीला हो तो यह संकेत देती है की साल के शुरुआत में आधा दिन खराब और आधा समय अच्छा दिखेगा । पूरा पीला है तो अशुभ माना गया है और पूरा हरा है तो उसको शुभ मानते हैं यानी पूरा साल हरा भरा रहेगा । जब जौ नीचे हरा होगा और ऊपर पीला होगा तो शुरुआत में अच्छा और आखिर में खराब का संकेत मिलता है ।

मां दुर्गा की 9 शक्तियां (रूप)

देवी माँतिथिवाहनभोगप्रिय वस्त्र रंगमंत्र
माता शैलपुत्री
(हिमालय कन्या पार्वती )
17.10.2020 शनिवारघोड़ा गाय का घी अथवा घी से बने पदार्थों का भोगपीला रंग ह्रीं शिवायै नम: ।
ब्रह्मचारिणी
( परब्रह्म परमात्मा को साक्षात् करने वाली)
18-10-2020 रविवार हाथीशक्कर का भोगहरा रंग ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: ।
चन्द्रघण्टा
(चन्द्रमा जिसकी घण्टा में हो )
19.10.2020, सोमवारहाथी दूध का भोग या खीरहल्का भूरा ऐं श्रीं शक्तयै नम: ।
कूष्माण्डा
(सारा संसार जिसके उदर में निवास करता हो )
20-10-2020 मंगलवारघोड़ा मालपुआ का भोग संतरी रंगऐं ह्लीं देवयै नम; ।
स्कन्दमाता
(कार्तिकेय की जननी )
21-10-2020 बुधवार नाव केला का भोगसफेद रंग ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: ।
कात्यायनी
(महर्षि कात्यायन के अप्रतिभ तेज से उत्पन्न होने वाली )
22-10-2020 गुरूवार डोली शहद का भोग लाल रंग क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: ।
कालरात्रि
(समस्त सृष्टि का संहार करने वाली )
23.10.2020 शुक्रवारडोलीगुड़ का भोग नीला रंग क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: ।
महागौरी
(शिव के महाकाली कहने पर क्रोध से जिन्होंने तपस्या कर ब्रह्मदेव से गौर वर्ण प्राप्त किया था )
24-10-2020 शनिवार

उपवास व्रत अष्टमी और महानवमी आज ही रहेगा ।
घोड़ानारियल या हलुआगुलाबी रंगश्री क्लीं ह्लीं वरदायै नम: ।
सिद्धिदात्री
( समस्त जगत को अणिमा , लघिमा ,प्राप्ति , प्राकाम्य , महिमा , ईशित्व ,वशित्व , कामावसायिता इस आठ रूपों से सिद्धि देने वाली)
25.10.2020 रविवार

नवमी तिथि 11.14 बजे दोपहर तक रहेगा उसके बाद दशमीं तिथी यानि विजयादशमी मनाया जायेगा ।
हाथीतिल , अनाज , या खीर का भोगबैगनी रंगह्रीं क्लीं ऐं सिद्वयै नम: ।

हर साल दुर्गा मां शेर की सवारी छोड़कर दिन के अनुसार अलग-अलग वाहन पर सवार होकर आती है । नवरात्रि में मां दुर्गा पृथ्वी पर पालकी , नाव , हाथी या घोड़े की सवारी करके आती हैं । दुर्गा मां का हर वाहन एक खास संकेत देता है । शनिवार और मंगलवार को घोड़े पर मां का आना शुभ संकेत नहीं है । रविवार और सोमवार को हाथी पर आती हैं जो अधिक वर्षा कि संकेत है। बुधवार को नाव पर सवार होकर आती है तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है । गुरूवार और शुक्रवार को डोली पर सवार होकर आती है । घोड़ा पर सवारी का तात्पर्य पड़ोसी देशों से युद्ध की स्थिति ,राजनीति और सत्ता में उथल-पुथल का संकेत देता है ।

इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 17 अक्टूबर यानी शनिवार से हो रही है । इस दिन घोड़े पर सवार होकर माताजी आती हैं जो राजनीतिक दृष्टि से अशुभ फल देगा । यदि सोमवार और रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा शेर सवारी छोड़कर हाथी पर सवार होकर आती है जो पानी ज्यादा बरसने कि संकेत देता है अन्न अधिक होगा । माताजी जिस वाहन से पृथ्वी पर आती है उसके अनुसार वर्ष में होने वाली घटनाओं का भी आकलन किया जाता है । घोड़े पर सवारी करने का तात्पर्य देश में युद्ध की स्थिति बनेगी और शासन सत्ता के लिए अशुभ माना जाता है । सरकार का विरोध और सत्ता परिवर्तन का योग बनता है ।

विजयादशमी रविवार को है यानी माता की विदाई रविवार के दिन हाथी पर सवारी होगी जो कि अधिक वर्षा का योग बनेगा और अन्न अधिक पैदा होगा । नाव पर सवारी करके आना और हाथी की सवारी से जाना दोनों शुभ है । देवी नौका पर आती है सबकी मनोकामनाएं पूर्ण कर देती है और डोली पर आती है तो महामारी का भय बना रहता है ।

शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनि भौमें तुरंगमे । गुरौ शुक्रे च डोलयाम् बूद्धे नौका प्रक्रीतिता ।।

गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे । नौकायं सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधूवम् ।।

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