श्री कृष्ण के छह विशेष संदेश

श्री कृष्ण के छह विशेष संदेश

भगवान श्री कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था । उन्होंने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात्रि में मथुरा में अवतार लिया था । इस शुभ मौके पर हम आपको उन 6 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं , जिनसे भगवान श्री कृष्ण को बेहद प्रेम था । इनमें बांसुरी, माखन- मिश्री , गाय , कमल, मोर पंख शामिल है । इन सब के पीछे एक संदेश भी छुपा हुआ है ।

(1) गाय

भगवान श्री कृष्ण को गायों से बहुत ज्यादा प्रेम था । वे उन्हें अपने सखे मानते थे । गाय का मूत्र, गोबर , दूध , दही और घी बहुत ही उपयोगी है । इन पांचों को पंचगव्य कहते हैं । इन्हें शुद्ध माना गया है । गाय को सभी गुणों से संपन्न माना जाता है ।

(2) माखन-मिश्री

मिश्री भगवान श्री कृष्ण को बेहद पसंद है । वे बड़े ही चाव से मिश्री का सेवन करते थे । मिश्री को जब माखन में मिलाया जाता है तो यह उसके हर हिस्से में समा जाती हैं । मिश्री अच्छे से घुल मिल जाने की सीख देती है ।

(3) बांसुरी

भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी भी बेहद प्यारी थी । बताया जाता है कि बांसुरी में 3 गुण होते हैं । पहला यह कि इसमें कोई गांठ नहीं होती जो यह संकेत देती है कि अपने मन में किसी तरह का मैल या गांठ न रखें । दूसरा यह जब बजती है तो मीठी आवाज निकालती है । जो कि हमें बताती है कि कभी भी कड़वा बोल ना बोलें हमेशा मधुर वाणी ही बोले । वहीं तीसरा यह है कि बिना बजाए बजती नहीं है । इसका मतलब हुआ कि जब तक कहा न जाए तब तक ना बोले ।

(4) पवित्र कमल

कमल का फूल कीचड़ में खिलता है लेकिन वह उससे अलग ही रहता है । इस फूल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है ।कमल से हमें पवित्र रहने की सीख मिलती है ।

(5) वैजयंती माला

भगवान श्री कृष्ण अपने गले में वैजयंती माला पहनते थे । यह माला कमल के बीजों से बनी हुई होती है । कमल के बीज ऐसे होते हैं वे कभी ना सड़ते हैं और ना ही टूटते हैं । उन की चमक हमेशा बरकरार रहती है । इससे सीधा-सीधा संदेश मिलता है कि आप जिंदगी भर सदाबहार रहे ।

(6) मोर पंख से प्रेम

भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख भी पसंद था । वे प्रेम में ब्रह्मचर्य की भावना को समाहित करने के लिए प्रतीक रूप में मोर पंख धारण करते हैं ।

श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर धारण करके इंद्र की क्रोधित वर्षा से गोप- गोपियों को बचाया था । श्रीकृष्ण जी सात दिनों तक वर्षा से रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत धारण किए थे । श्री कृष्ण एक दिन में 8 बार खाते थे । यानि सात दिन में 56 बार खाना नहीं खाये । उपवास 7 दिन तक किए, इसलिए श्रीकृष्ण को 7 दिन में , एक दिन का आठ बार ( सात *आठ )जोड़कर 56 प्रकार के भोग चढ़ाते हैं ।

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