दिमागी बुखार (जापानी इंसेफ्लाइटिस) – कई वर्षों से रोकथाम के प्रयाश अभी भी विफल

दिमागी बुखार (जापानी इंसेफ्लाइटिस) – कई वर्षों से रोकथाम के प्रयाश अभी भी विफल

दिमागी बुखार (जापानी इंसेफ्लाइटिस) के मरीजों की मौत का सिलसिला जारी है। बी.आर.डी. मेडिकल कालेज, गोरखपुर में रोज पुर्वांचल के अलावा बिहार के भी बच्चे इलाज के लिए भर्ती किए जाते हैं, परन्तु ये गंभीर रोग अब भी अपना रहस्य बरक़रार रखे हुवे है | नेहरु अस्पताल में कई सौ मरीजो का इलाज चल रहा है, और रोजाना कई बच्चे दम तोड़ रहे हैं |

एक आकडे के मुताबिक, इस साल में बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में लगभग १९०० मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 5०० से ज्यादा की मौत हुई है। करोड़ो रूपये खर्च करने, आधुनिक बेड सुविधा और चिकित्सा पद्धति से लैस होने के बावजूद मासूमों को ये जानलेवा बीमारी मौत के आगोश में पंहुचा रही है |

पिछले वर्ष डॉ श्रीवास्तव ने एक अच्छे मुहीम की शुरुवात की थी, और ‘पहल’ बैनर के तले जागरूक लोगों के समूह के माध्यम से अब भी प्रयासरत हैं | ये बीमारी तक़रीबन ३० सालों से पूर्वांचल में तबाही मचाये हुवे है | इसकी वजह पता करने के लिये अमेरिका से डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम भी यहाँ दौरा कर चुकी है | मौत का सिलसिला कुछ कम हुवा है ऐसा कहना उचित नही है क्योंकि अब भी  मौत का प्रतिशत बचने से ज्यादा है | मूल कारणों का अब तक पता भी नही लगा है ताकि रोकथाम किया जा सके |

अमेरिका की विशेषज्ञ टीम जो CDC (Center for Disease Control) से है, इस पर विगत कई वर्षों से खोजबीन कर रही है।

पूर्वांचल के लोगों का एम्स के लिए, माननीय प्रधानमत्री महोदय से आस लगाना गलत नही है, और उम्मीद है कि उन तक ये बात पहुचेगी |

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