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हरिवंश वर्णन (श्री कृष्ण कथा)

गरुड़ पुराण के अनुसार , ब्रह्मा जी ने कहा ----अब मैं हरिवंश का वर्णन करूंगा , जो भगवान कृष्ण के महात्म्य से परिपूर्ण होने के कारण श्रेष्ठतम है । पृथ्वी पर धर्म आदि की रक्षा और अधर्म आदि के विनाश के लिए वसुदेव तथा देवकी से कृष्ण और बलराम का प्रादुर्भाव हुआ था । जन्म के कुछ ही दिन बाद कृष्ण ने पूतना के स्तनों को दृढ़ता पूर्वक पीकर उसे मृत्यु के पास पहुंचा दिया था । तदनन्तर शकट (छकड़े) को बाल क्रीड़ा में उलट कर सभी को विस्मित करते हुए इन्होंने यमलार्जुन-उद्धार , कालियनाग- दमन ,

रामचरित वर्णन (रामायण की कथा)

गरुण पुराण के अनुसार , ब्रह्मा जी ने कहा ---- अब मैं रामायण का वर्णन करता हूं , जिसके श्रवण मात्र से समस्त पापों का विनाश हो जाता है । भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई । ब्रह्मा से मरीचि , मरीचि से कश्यप , कश्यप से सूर्य , सूर्य से वैवस्वत मनु हुए । वैवस्वत मनु से इक्ष्वाकु हुए । इन्हीं इक्ष्वाकु के वंश में रघु का जन्म हुआ । रघु के पुत्र अज से दशरथ नामक महा प्रतापी राजा ने जन्म लिया । उनके महान बल और पराक्रम वाले 4

प्रतिभा (कहानी)

किसी गांव में एक तालाब हुआ करता था । उस तालाब के किनारे कुछ गुलाब के फूल उगे हुए थे । सुबह-सुबह गांव के सभी लोग बूढ़े, बच्चे , महिलाएं , पुरुष तालाब के किनारे घूमने आया करते थे । वह गुलाब के फूल हर किसी का मन मोह लेते थे । जिस किसी की भी नजर उन फूलों पर पड़ती वह उनकी सुंदरता की तारीफ करते नहीं थकता था । उन्हीं फूलों में लगे पत्ते रोज यह सब देखते थे, और उनको लगता कि कभी तो कोई उनकी भी तारीफ करेगा । लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ ।
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कठिन होते हैं साधुओं के हठयोग

साधु-संत की अपनी अलग ही दुनिया है । बाहर से सामान्य दिखने वाले इन साधुओं के भी कई नाम व प्रकार होते हैं । कुछ साधु अपने हठयोग के लिए जाने जाते हैं , कुछ अपने संप्रदाय के नाम से जाने जाते हैं । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे अर्ध कुंभ एवं महाकुंभ में ऐसे अनेक साधु संतों का जमावड़ा लगा रहता है , जो अपने हठयोग के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं । आज हम आपको साधुओं से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातें बता रहे हैं , जिनके बारे में बहुत कम

तुलसी और तुलसी के गुण

हिंदू धर्म ग्रंथों और आयुर्वेद में तुलसी का जितना बखान किया गया है , उतना किसी और वृक्ष और पौधे का शायद ही किया गया हो । इन ग्रंथों में रेखांकित किया गया है कि तुलसी धार्मिक , आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक महत्व की दृष्टि से विलक्षण पौधा है । जिस घर में इसकी स्थापना होती है, वहां आध्यात्मिक उन्नति के साथ सुख, शांति और समृद्धि स्वमेव आती है । इससे वातावरण में स्वच्छता और शुद्धता बढ़ती है, प्रदूषण पर नियंत्रण होता है , आरोग्य में वृद्धि होती है जैसे अनेक लाभ इससे प्राप्त होते हैं ।

भगवान शिव के सामने नंदी की मूर्ति की स्थापना का रहस्य

भगवान शिव की जहां पूजा होती है , वहां नंदी का जिक्र तो होता ही है । अक्सर हम देखते हैं कि भगवान शिव के सामने ही उनके वाहन नंदी की मूर्ति स्थापित होती है । जिस प्रकार भगवान शिव के दर्शन और पूजन का महत्व है , उसी प्रकार नंदी का दर्शन किया जाता है । नंदी भगवान शिव के वाहन ही नहीं वे उनके परम भक्त भी हैं । भगवान शिव महान तपस्वी माने जाते हैं । इसलिए वे समाधि लिए बैठे रहते हैं । कहा जाता है कि अगर अपनी मनोकामना नंदी के कान में
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तुलसी और तुलसी के गुण

हिंदू धर्म ग्रंथों और आयुर्वेद में तुलसी का जितना बखान किया गया है , उतना किसी और वृक्ष और पौधे का शायद ही किया गया हो । इन ग्रंथों में रेखांकित किया गया है कि तुलसी धार्मिक , आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक महत्व की दृष्टि से विलक्षण पौधा है । जिस घर में इसकी स्थापना होती […]

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ज्ञान का दीपक

काशी में गंगा नदी के तट पर एक संत का आश्रम था । एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा, ” गुरुवर , शिक्षा का निचोड़ क्या है?” संत ने मुस्कुरा कर कहा, एक दिन तुम खुद ब खुद जान जाओगे । बात आई और गई । कुछ समय बाद एक रात संत ने उस […]

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Civil Services Exam – 2013 final result: Purvanchal plays it’s role

IAS – 2014 Notification