भाग २ -बलिया एक तपोस्थली – महर्षि भृगु  की मुक्ति, दर्दर मुनि, ददरी का प्रमुख पशु मेला, मंगल पांडे, प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

भाग २ -बलिया एक तपोस्थली – महर्षि भृगु की मुक्ति, दर्दर मुनि, ददरी का प्रमुख पशु मेला, मंगल पांडे, प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

यहां पर एक बहुत प्रसिद्ध भगवती जी का मंदिर है जो रेवती के बगल में एक छोटे से गांव सोमनाथपुर में स्थित है । बलिया में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय स्थित है , जिसकी स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2016 में की गई थी । इससे 122 कालेज से अधिक सम्बद्ध है । बलिया जिले की उत्तरी और दक्षिणी सीमा सरयू और गंगा नदी द्वारा बनाई जाती है । भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस जिले के निवासियों के बागी तेवर के कारण इसे बागी बलिया के नाम से भी जाना जाता है

इस धरती ने भारत देश को अमूल्य सपूत दिए हैं । मंगल पांडे, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पांडे का जन्म , बलिया जिले के नगवां गांव में हुआ था । चित्तू पांडे—– 1942 के आंदोलन में इस कांग्रेसी नेता के नेतृत्व में बलिया में स्वतंत्र सरकार का गठन हुआ था । राम कैलाश राय —–देवरिया नामक गांव को अपनी जमीन पर बसाया था, जिसमें सिर्फ जनजाति के लोग थे ‘सोशल एक्टिविस्ट ‘ । राम नगीना सिंह—- 1952 के प्रथम सांसद ( प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी ) बलिया , गाजीपुर संयुक्त लोकसभा सीट से चुने गए थे । गौरी शंकर भैया , गौरी शंकर राय , काशीनाथ सिंह — पूर्व मंत्री रह चुके हैं । जयप्रकाश नारायण —नेता थे । चंद्रशेखर —भारत के नवें प्रधानमंत्री थे । जनेश्वर मिश्र — समाजवादी नेता थे , जिनको छोटे लोहिया के नाम से पुकारा जाता था । विश्वनाथ उपाध्याय , सुदर्शन पाठक , बच्चन पांडे —-स्वतंत्रता सेनानी थे । परशुराम चतुर्वेदी , हजारी प्रसाद द्विवेदी , डॉक्टर उदय नारायण तिवारी , भगवत शरण उपाध्याय , डाक्टर कृष्ण बिहारी मिश्र , डाक्टर कृष्ण देव उपाध्याय , भैरव प्रसाद गुप्त , अमरकांत , डाक्टर केदारनाथ सिंह , दूधनाथ सिंह , डॉ रविंद्र नाथ श्रीवास्तव —प्रख्यात हिंदी साहित्यकार थे । यह वार्षिक मेला ददरी , एक मैदान पर , शहर के पूर्वी सीमा पर गंगा और सरयू नदियों के संगम पर मनाया जाता है ।

बलिया का मऊ , आजमगढ़ , देवरिया , गाजीपुर और वाराणसी जिलों के संपर्क रेल और सड़क द्वारा जुड़ा है । रसड़ा यहां से 35 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक कस्बा है । यहां नाथ बाबा का मंदिर है । जो स्थानीय सेंगर राजपूतों के देवता हैं

इसके अलावा यहां दरगाह हजरत रोशन शाह बाबा , दरगाह हजरत सैयद बाबा और लखनेसर डीह के प्राचीन अवशेष दर्शनीय स्थल है । नरही थाना क्षेत्र में बाबू राय बाबा का मंदिर है । जो कि नरही वासियों की लोकप्रिय देवताओं में से एक महत्वपूर्ण माने जाते हैं ।

भगवान विष्णु को लात मारने पर महर्षि भृगु को जो श्राप मिला था , उससे मुक्ति इसी क्षेत्र में ही मिली थी । तपस्या पूरी होने पर भृगु के शिष्य दर्दर मुनि के नेतृत्व में यज्ञ हुआ था , जिसमें 88 हजार ऋषियों का आगमन हुआ था । उसके बाद शुरू हुई यह परंपरा कुछ समय के बाद ‘लोक मेला ‘ में बदल गई । पूरे पूर्वांचल और बिहार के लोग , जो देश – विदेश में रहते हैं या घर पर रहते हैं , सभी लोग इस मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं ।

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