भाषा रे भाषा तेरा रँग कैसा – जिसमे मिला दो उसी के जैसा।

इन मामलों का सत्यानाश बुद्धि और राज की नीति ने किया है वरना भाषा तो जहाँ जिससे मिली उसमे समा अपना – अपना स्वाद बखूबी अलग सम्हाले और महसूस कराती रही।

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