जब कोई भी निर्णय गैर परंपरागत रूप से ही लिया जाना है, तो क्यों न…

ऐसे में जब सदन में कोई विपक्षी दल इसकी योग्यता नहीं रखता और कोई भी निर्णय गैरपरंपरागत रूप से ही लिया जाना है, तो क्यों न .. पहली बार देश के सदन में 37 और 34 की संख्या के साथ आयी जयललिता जी और ममता जी की पार्टी के सहमति वाले गठबंधन को नेता प्रतिपक्ष की भूमिका दी जाय

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