जब कोई भी निर्णय गैर परंपरागत रूप से ही लिया जाना है, तो क्यों न…

जब कोई भी निर्णय गैर परंपरागत रूप से ही लिया जाना है, तो क्यों न…

Parliament house of India
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मौजूदा संसद में कांग्रेस के पास सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में 44 सांसद हैं लेकिन कुल 554 संख्या के 10 फीसदी यानी 54/55 से कम .. जो किसी भी पार्टी को मुख्य विपक्षी दल के रूप में और उसके नेता को नेता प्रतिपक्ष के रूप में चुने जाने का अधिकारी बनाता है।

इस लोकसभा में विपक्षी दल और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए किसी की भी अहर्ता न होने के चलते दो तरीकों से इसे किया जा सकता है।

1- संसद खुद अपने बनाये इस 10% के नियम में छूट दे .. जो उसके अधिकार क्षेत्र में हैं।

2- विपक्षी दल एक सहमति कायम करें और सबसे बड़े विपक्षी गठबंधन की सहमति की किसी एक पार्टी के नेता को नेता प्रतिपक्ष .. और दूसरे को क्रमशः .. उप नेता प्रतिपक्ष बनाया जाय। ध्यान रहे नियम के अनुसार किसी गठबंधन के नेता को, नेता विरोधी दल नहीं बनाया जा सकता।

कांग्रेस के बाद इस सदन में जयललिता जी की AIDMK 37 सीट और ममता बनर्जी की TMC 34 के साथ दुसरे और तीसरे नंबर पर है।

ऐसे में जब सदन में कोई विपक्षी दल इसकी योग्यता नहीं रखता और कोई भी निर्णय गैरपरंपरागत रूप से ही लिया जाना है, तो क्यों न .. पहली बार देश के सदन में 37 और 34 की संख्या के साथ आयी जयललिता जी और ममता जी की पार्टी के सहमति वाले गठबंधन को नेता प्रतिपक्ष की भूमिका दी जाय !! पिछले दिनों इन दोनों नेत्रिओं में सहमति के संकेत भी दिखे।

ऐसा करने से सत्ता पक्ष में बदलाव के साथ- साथ विपक्ष के चेहरे में भी बदलाव होगा, कांग्रेस को जमीनी संगठनात्मक काम करने को समय मिलेगा और दक्षिण तथा पूर्वोत्तर को एक नयी भूमिका …. जो शायद देश के लोकतंत्र में क्षेत्रीय असंतुलन की कभी कभी होने वाली बात की भरपाई की दिशा में भी जायेगा ऐसा मेरा सोचना है।

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