कोरोना वायरस ( विषाणु )

कोरोना वायरस ( विषाणु )

हुए कोई पैदल , कोई साइकिल से , कोई मोटरसाइकिल से , कोई ठेला गाड़ी तो कोई ट्रक से, कोई बस से, कोई ट्रेन से भागकर अपने पैतृक गांव आ जाता है ।

“पैरों में यदि जान हो , तो मंजिल दूर नहीं ।और दिल में यदि स्थान हो , तो अपने दूर नहीं ।”

कार्यस्थल से जब मजदूर घर जाने को तैयार होता है , तो फैक्ट्री मालिक उनको रोकने की कोशिश करता है । तो मजदूर क्या कहता है —–

“गर लौट सका तो जरूर लौटूंगा , तेरा शहर बसाने को ।
पर आज मत रोको मुझको , बस मुझे अब जाने दो ।।
मैं खुद जलता था , तेरे कारखाने की भट्ठियां जलाने को ।
मैं तपता था धूप में , तेरी अट्टालिकायें बनाने को ।।
मैंने अंधेरे में खुद को रखा , तेरा चिराग जलाने को ।
मैंने हर ज़ुल्म सहे , भारत को आत्मनिर्भर बनाने को ।।
मैं टूट गया हूं , समाज की बंदिशों से ।
मैं बिखर गया हूं , जीवन की दुश्वारियों से ।।
मैंने भी एक सपना देखा था , भरपेट खाना खाने को ।
पर पानी भी नहीं नसीब हुआ , दो बूंद आंसू बहाने को ।।
मुझे भी दु:ख में , मेरी मांटी बुलाती है ।
मेरे भी बूढ़े मां बाप , मेरी राह देखते हैं ।।
मुझे भी अपनी मांटी का , कर्ज चुकाना है ।
मुझे मां-बाप को , वृद्धाश्रम नहीं पहुंचाना है ।।
मैं नाप लूंगा सौ योजन , पांव के छालों पर ।
मैं चल लूंगा , मुन्ना को रखकर कंधों पर ।।
पर अब मैं नहीं रुकूंगा , जेठ के तपते सूरज में ।
मैं चल पड़ा हूं , अपनी मंजिल की ओर ।।
गर मिट गया अपने गांव की मिट्टी में , तो खुशनसीब समझूंगा ।
गर लौट सका तो जरूर लौटूंगा , तेरा शहर बसाने को ।।
पर आज मत रोको मुझको , बस मुझे अब जाने दो ।।”

इस करोना वायरस को मारने के लिए अभी तक कोई दवा विकसित नहीं हुआ है । फिर भी आयुर्वेदिक दवा से कोरोना वायरस को मार सकते हैं । ‘आयुर्वेदिक आयुष काढ़ा ‘ आज बहुत फायदेमंद लग रहा है जो कि अपने घरेलू मसाला से ही निकाल कर बनाते हैं । जैसे तुलसी पाउडर या तुलसी पत्ती , काली मिर्च , सोंठ , दालचीनी , गुड़ , अजवाइन , नींबू रस , लहसुन , गरम पानी , चाय ,काफी , हल्का खाना इन चीजों का उपयोग करके हम कोरोना वायरस से लड़ सकते हैं । इसमें ध्यान देना है कि खाली पेट नहीं रहना है । उपवास नहीं करना है । रोज 1 घंटे धूप लेना है । ए .सी. का प्रयोग नहीं करना है । गरम पानी पीना है , और गले को गीला रखना है । चाय में अदरक डालकर पीना है । आधा चम्मच सोंठ हर सब्जी में डालकर पकाएं । सरसों का तेल नाक में लगाएं । घर में कपूर और लौंग डाल की धूनी दें । रात को दही का सेवन ना करें । फल में ज्यादा संतरा खाए । रात को हल्दी डालकर दूध पियें । सभी लोग बार-बार हाथ को साबुन से धोयें । सभी लोग मास्क का उपयोग करें । सुबह में खाली पेट गर्म पानी में नींबू डालकर पियें ।

किंतु आज कुछ आदतें ऐसी हैं कि बीमारी को बढ़ा देती हैं । जैसे कि स्मोकिंग :–बीड़ी , सिगरेट नहीं पीना चाहिए । इससे गंभीर करोना का 3 गुना ज्यादा जोखिम रहता है । शराब पीना :— शराब नहीं पीना चाहिए । शराब फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है , जिससे करोना वायरस शीघ्र ही अटैक करता है । नींद का पुरा ना होना :—कम सोने पर बीमारी की आशंका चार – पांच गुना अधिक रहती है । नाखून चबाना :— नाखून लंबे हो तो 20 सेकंड हाथ धोने पर भी बीमारी का खतरा बना रहता है । इसलिए नाखून नहीं बढ़ाना चाहिए। मास्क लगाकर बाहर निकले । दो गज की दूरी बना कर रहें । यह जीवन और आजीविका दोनों के लिए जरूरी है ।

आप स्वस्थ रहें , देश आगे बढ़ेगा । अपने शरीर की इम्युनिटी (शरीर की स्वयं रोगों से लड़ने की ताकत ) को बढ़ाएं । और नीचे लिखे हुए चीजों को अपने दिनचर्या में करें :—योगा , व्यायाम या कोई खेल , घर का बना हुआ शुद्ध भोजन , आंवला किसी भी रूप में खाएं ,फल ( खासकर खट्टे फल ) , हरी सब्जियां , दालें , गुड़ , शुद्ध तेल ( कोई भी रिफाइंड बिल्कुल नहीं लेना है) , तुलसी व अन्य आयुर्वेदिक पेय पदार्थ लेना है । दूध , दही ,लस्सी ,घी इत्यादि लेना है । कोरोना वायरस को मारने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग किया जाता है । बताते हैं कि सेनीटाइजर का लगातार प्रयोग करने से लगभग 2 महीने के बाद कैंसर , त्वचा रोग का खतरा हो सकता है । लिवर , किडनी , फेफड़ा को नुकसान पहुंचा सकता है । क्योंकि बेंजाल कोनियम क्लोराइड से स्किन रोग हो सकता है । फेथलेट्स से लीवर किडनी के रोगों का खतरा रहता है । ट्राइकोसान से मांसपेशियों में ऐंठन अकड़न की समस्या पैदा होते हैं ।

इसलिए घरों में नींम के साथ उबले हुए पानी , नमक के पानी से हाथ धोयें । और वायरस को मारने का यह सस्ता और फायदामन्द उपाय अपनाएं । कोरोना से डरो मत । लेकिन यह बात जो कोरोना सिखा गया है , उसे मत भूलो । सोसल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी ) ,मुंह पर मास्क और हाथों की सफाई की आदत डाल लो । करोना कि सिखाई गई बातों पर ध्यान रखेंगे तो करोना अपने से सदैव दूर ही रहेगा और हम लोग सुरक्षित रहेंगे । अब कोरोना से डरें नहीं , करोना के साथ रहकर हमें जीना है ।

कोरोना वायरस के आने से पहले क्या था और अब वायरस आने के बाद क्या हो गया है :—- वायरस आने से पहले हम कहते थे ‘समय मूल्यवान है’ । लेकिन कोरोना आने के बाद कहते हैं ‘जिंदगी मूल्यवान है ‘ । पहले कहते थे ‘पानी बचाओ ‘ अब कहते हैं ‘ कम से कम 20 सेकंड हाथों को धोना हैं और वह भी दिन में कई बार यानी पानी खर्च करो ।’ पहले कहते थे ‘अल्कोहल सेहत के लिए हानिकारक है ‘ लेकिन अब कहते हैं ‘ 85% अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर इस्तेमाल की सलाह दिया जाता है । पहले ‘सामाजिक होना अच्छी बात थी ‘ और अब ‘समाज से दूरी बना कर रहे हैं यह अच्छी बात है ‘। कहा गया है— रहिमन वहां ना जाइए , जहां जमा हो लोग । ना जाने किस रूप में , लगे कोरोना रोग ।। पहले बच्चों को मोबाइल से दूर रखते थे और आज मोबाइल से ऑनलाइन क्लास / कोचिंग करना जरूरी है । पहले घूमना सेहत के लिए अच्छी बात थी और अब घूमना मना है । घर पर रहें बाहर ना निकले , यानी घर में रहें सुरक्षित रहें । पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करते थे और अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट में जाने से बचें कहते हैं । पहले कहते थे ‘अतिथि देवो भव:’ और अब कहते हैं ‘अतिथि से बचें ‘ । इस प्रकार कोरोना वायरस आने से पहले और वायरस आने के बाद बहुत अंतर हो गया है । जो चीज पहले अच्छा था वह खराब हो गया है और जो खराब काम था वह अच्छा हो गया है।

पहले कोई बाहर से आता था तो दोस्त बोलता था — मुंबई से आया मेरा दोस्त , दोस्त को सलाम करता हूं । और अब अगर बाहर से दोस्त आता है तो वही दोस्त कहता है —मुंबई से आया मेरा दोस्त , पुलिस को इनफॉर्म करता हूं । इसलिए करोना से बचाव के लिए हमको नीचे लिखे हुए बातों पर ध्यान देना चाहिए :—- मुंह पर मास्क ,फेस कवर ,गलव्स लगाना जरूरी है । हैंड सेनेटाइज करना जरूरी है । सामाजिक दूरी (कम से कम दो गज ) बनाना चाहिए । अति आवश्यक होने पर ही बाहर जायें । दाढ़ी न बढ़ाएं और ना ही हजाम के पास बनवाएं । बालों की कटिंग कराने सैलून न जाएं , स्वयं करें । या फिर नाई को घर पर बुलाया लें । हजाम मास्क पहना हो और उसके हाथों को साफ करवाएं । कंघी , कैंची , ब्लेड , रूमाल आदि सब सामान हमारे अपने होने चाहिए । बेल्ट नहीं पहने, अंगूठी , कलाई घड़ी आदि न पहनें । मोबाइल आपको समय बता ही देता है । हाथ रुमाल का उपयोग नहीं करें , सैनिटाइजर और टिशु पेपर साथ रखें और जब जरूरी हो तो इस्तेमाल करें । घर में जूते पहनकर प्रवेश ना करें , उन्हें बाहर ही उतारे । बाहर से घर आने पर बाहर ही हाथ और पैर धोकर घर में प्रवेश करें । यदि आपको लगता है कि आप किसी संदिग्ध के संपर्क में आ गए हैं तो पूरा स्नान करें , भाप लें , गर्म काढ़ा पीयें ।

घर का मालिक ही क्यों न हो , अगर वह बाहर से आता है तो उनके बेटा , बहू , औरत , मां – बाप घर में नहीं घुसने देते हैं । 14 दिन के लिए बाहर स्कूलवास करने को मजबूर कर देते हैं । पैरों में छाले पड़े होते हैं , थकान होता है फिर भी रिश्ते का ख्याल न करते हुए कोई भी व्यक्ति उनसे बात करने को तैयार नहीं होता है । उन्हें मच्छर काटे या जो भी हो बाहर का रास्ता दिखा देते हैं । कोरोना रिश्ता में जहर घोलता है । करोना जैसी महामारी को झेलते हुए भी पेट के लिए आदमी काम करने को मजबूर है । “तुलसी भरोसे राम के , निर्भय होकर सोए । अनहोनी होनी नहीं , होनी हो सो होये ।। कोरोना वायरस ने एक नए भगवान का जन्म दिया है , जिसका नाम है ‘कोरोना माई ‘ । कोरोना माई के नाम से पूजा पाठ आदि कार्यक्रम किया जाता है ।

पुरूषों के घर में रहने से महिलाओं को आराम हो गया है । पुरुष काम में हाथ बटाते हैं और बी.जे.पी. , बी .जे.पी. करते हैं । बी यानी बर्तन , जे का मतलब झाडू , पी से पोछा करना पड़ता है । साथ में खाना बनाने में भी सहयोग करते हैं । विदेश यात्रा एवं स्वदेश यात्रा स्थगित । अनावश्यक यात्रा न करें । बाहर का खाना ना खाएं । अनावश्यक शादी विवाह एवं ऐसे ही अन्य समारोह में ना जायें । भीड़-भाड़ वाले स्थान पर ना जायें । सामाजिक दूरी का पालन करें । अनावश्यक मिलना जुलना बंद रखें । जिस व्यक्ति को खांसी जुकाम हो उससे दूरी बना कर रहें । मास्क , फेस कवर , गलव्स भी लगाएं ।अपने आस-पास गंदगी ना करें , सफाई रखें । शाकाहारी भोजन करें , मांसाहारी भोजन मना है । रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें । सैलून , ब्यूटी पार्लर न जाएं सावधानी रखें । कोरोना वायरस के डर से चोरी नहीं होता है । अगर कोई सामान रास्ते में गिर जाता है तो कोई डर के मारे उठाता नहीं है । जैसे ₹2000 का नोट गिर जाए तो उधर से आने जाने वाला व्यक्ति नोट देख कर के भी डर से नहीं उठाते हैं । कहते हैं कि उसमें कोरोना वायरस लगा होगा । इस प्रकार कोरोना वायरस से हानि अधिक और फायदा कम है । अब मैं आपको जन और धन की हानि पहुंचाने वाले कोरोना के कुछ फायदे गिनाते हैं:—–हाथ जोड़कर प्रणाम करना । यहां संस्कृति और पुरानी परंपरा वापिस होती है । एक साथ एक परिवार का मिलन होता है । रीति- रिवाज एवं संस्कृति का ज्ञान होता है । पैदल और साइकिल को बढ़ावा देना । पैदल चलने की प्रैक्टिस , टैक्सी बस ट्रेन का बहिष्कार । शरीर व मस्तिष्क को आराम । दूरी का पालन करना , दूर से बात एवं काम करने की आदत डालना । गर्लफ्रेंड एवं ब्वॉयफ्रेंड कि दोस्ती में बाधा । पति-पत्नी के संबंधों में बाधक । हाथों – पैरों , पूरे शरीर और वस्त्रों की सफाई । मास्क द्वारा नाक एवं मुंह को संक्रमण से बचाव ।

पलायन करने वालों की रुकावट । स्वरोजगार को बढ़ावा । नई सोच को उजागर करना । स्कूल छोड़कर शहर जाने वालों को फिर से स्कूल में दाखिला देना । सीता के लक्ष्मण रेखा के तरह चौखट के अंदर रहने की आदत डालना । जो डर गया वह बच गया, जो डरा वही बचा । पुरानी कहावत जो डरा वह मरा की कहावत फेल हो गयी । दूध की चाय के बदले काली चाय का आयुर्वेदिक काढ़ा पीना । राम के बनवास के तरह से 14 दिन का स्कूलवास । अंग्रेजी दवा से बेहतर जड़ी -बूटी , घास -पात का काढ़ा जैसी पुरानी दवा कारगर । गरम पानी और पुरानी दवा (हल्दी, दूध )का और फल फूल का सेवन फायदेमंद । नशेड़ियों के नशा पर प्रतिबंध । चोरी पर प्रतिबंध । ब्यूटी पार्लर के बदले, प्राकृतिक त्वचा कायम रखना । होटल और बाहर के खाने की आदत बंद करके घर का खाना , खाना । घर पर काम करने वालों के जगह पर खुद से काम करने की आदत डालना । खेती किसानी पर निर्भरता को बढ़ावा । जन्मभूमि को याद दिलाती है जैसे मजबूरी में भगवान याद आते हैं उसी तरह कोरोना वायरस में गांव याद आता है । दूर से दोस्ती- रिश्तेदारी निभाने की आदत । प्रदूषण में सुधार । नदियों की सफाई बिना खर्च के । यात्रा के सभी संसाधनों को रोककर, भाड़ा खर्च से बचाव । स्वावलंबी बनने की आदत डालना । बीड़ी , सिगरेट, शराब , गुटका आदि नशा में कमी ।शाकाहारी भोजन को बढ़ावा । अनावश्यक यात्रा से बचाव । आसपास की सफाई करना । रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना । वाहन पर क्षमता के अनुसार बैठना । शादी विवाह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम पर होने वाले खर्च में कमी । पुरानी परंपरा को कायम रखना । घर पर दाढ़ी बना कर पैसे की बचत करना । इस प्रकार कोरोना बीमारी नुकसानदायक होते हुए भी हमें कुछ फायदा देता है और यह गरीबी – अमीरी नहीं पहचानता है । ऊंच-नीच नहीं पहचानता वह कभी भी किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है । इसलिए सावधान रहें । गरीब मीलों चलता है , भोजन पाने के लिए । अमीर मीलों चलता है, उसको पचाने के लिए ।। किसी के पास खाने के लिए , एक वक्त की रोटी नहीं । किसी के पास एक रोटी , खाने के लिए वक्त नहीं ।। कोई अपनों के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता है । कोई रोटी के लिए अपनों को छोड़ देता है ।। दौलत के लिए सेहत खो देता है । सेहत पाने के लिए दौलत खो देता है ।। जीता ऐसे हैं , जैसे कभी मरेगा ही नहीं । और मर ऐसे जाता है , जैसे कभी जिया ही नहीं ।। एक मिनट में जिंदगी नहीं बदलती । पर एक मिनट में लिया गया फैसला , जिंदगी बदल देता है ।।

कोरोना वायरस जैसी वायरस, अपना नाम बदल – बदल कर एक भयानक महामारी के रूप में हर 100 साल के बाद एक बार आती है । यदि 400 साल पहले से यह आंकड़ा देखा जाय तो सन् 1720 में प्लेग नामक महामारी , सन् 1820 में कोलेरा (हैजा) नामक महामारी , सन् 1920 में स्पेनिश फ्लू ( इनफ्लुएंजा ) और सन् 2020 में कोरोना वायरस के रूप में यह भयानक महामारी वापस आई है । जब भी यह महामारी आती है , तब दुनिया के किसी भी कोने को नहीं छोड़ती है । और हर सौवें साल कई लाखों मनुष्यों की जान लेकर चली जाती है । यह आंकड़ा देखें तो करोड़ों इंसानों की जान , यह महामारी 400 साल में ले चुकी है । और मोहल्ले , गांव को वीरान बना कर चली जाती है । मैं आप लोगों को इस भयानक महामारी के विषय में यह बताना चाहता हूं । कि यह बीमारी किस रूप में कोरोना वायरस बनकर हमारे बीच आकर , पूरे दुनिया में फैलकर मौत का तांडव रच रही है और पूरे देशवासी और विदेशी इस कोरोना वायरस से लाखों भाई – बहनों , मां – बाप , बेटा-बेटी खो चुकें हैं ।

वायरस से संबंधित बीमारी के लक्षण में अंतर क्या होता है ? ( पैथोलॉजी विभाग एम्स , दिल्ली के अनुसार ) :—

  1. वायु प्रदूषण के लक्षण — सूखी खांसी + छींक ।
  2. सामान्य जुकाम के लक्षण — खांसी + बलगम + छींक + बहती नाक ।
  3. फ्लू के लक्षण — खांसी + बलगम + छींक + बहती नाक + शरीर में दर्द + कमजोरी + हल्का बुखार ।
  4. कोरोना वायरस के लक्षण — सूखी खांसी + छींक + शरीर में दर्द + कमजोरी + तेज बुखार + सांस लेने में कठिनाई ।
  5. इस प्रकार इसके लक्षण है ।

अब मैं कोरोना वायरस के विषय में बता रहा हूं कि इसके लक्षण कैसे-कैसे दिन – प्रतिदिन बदलते रहते हैं । (१) एक दिन से तीन दिन तक —(अ) बुखार (ब) गले में दर्द । (२) चौथे दिन —(अ) बुखार , सिर दर्द , दस्त (ब) गले में दर्द (स) आवाज में भारीपन । (३) पांचवें दिन —(अ) थकान (ब) मांसपेशियों में दर्द । (४) छठा दिन —(अ) हल्का बुखार (ब) गीली या सूखी खांसी (स) सांस लेने में तकलीफ (द) उल्टी दस्त । (५) सातवां दिन — (अ) तेज बुखार (ब) बलगम के साथ खांसी (स) शरीर में दर्द (द) उल्टी दस्त । (६) आठवां दिन व नौवां दिन — (अ) लक्षण और ज्यादा खराब (ब) बुखार से अस्त-व्यस्त (स) बहुत ज्यादा खांसी (द) सांस लेने में परेशानी । यह सब लक्षण कोरोना वायरस में आते हैं । अब कोरोना ने अपना लक्षण बदल दिया है । कोरोना के बदले हुए लक्षण इस प्रकार है :—(१) नाक और मुंह के जरिए प्रवेश करके गले में रुक जाता है । (२) गले में यह वायरस 6 से 7 दिन तक अपनी संख्या बढ़ाता है । (३) गले की कोशिकाओं को जकड़ते करते हुए उन्हें सुन्न करता जाता है । (४) कोशिकाएं सुन्न होने से सूंघने की शक्ति कम हो जाती है । (५) दिमाग तक इंफेक्शन का कोई सिग्नल नहीं पहुंच पाता है ।

इस कोरोना महामारी के आने के वजह से हमको लगता है कि प्रकृति ने हमसे नाराज होकर ऐसी महामारी को भेजा है । ऐसे में —–

प्रकृति तेरा रूठना भी जरूरी था । इंसान का घमंड टूटना भी जरूरी था ।।

हर कोई खुद को खुदा समझ बैठा था । ये शक दूर होना भी जरूरी था ।।

इस प्रकार कुदरत मनुष्य को समझाती है , हे इंसानों घमंड मत करो । कोरोना के आने की वजह से ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था तहस – नहस हो गई है , लोगों के सामने खाने-पीने का संकट आ गया है । कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण के कारण देश – विदेश में रहने वाले प्रवासी मजदूर अपने वतन को यादकरते

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