भोजपुरी सिनेमा के चित-पट

सोचे के बात ई बा कि आखिर कौन कारण रहे कि 1982 के बाद भोजपुरी में सिनेमा बनल बंद हो गइल? लोग काहे भोजपुरी सिनेमा देखल छोड़ देलक? सब लोग हिन्‍दी सिनेमा के ही दीवाना काहे हो गइल? ई घटना तमिल, तेलगू, कन्‍नड़ आउर मलयालम सिनेमा के साथे काहे ना घटल? बाजारवाद के समय बा। पइसा हर चीज के पैमाना बन गइल बा। आछा फिलम के संख्‍या घटते आवता और अश्‍लील फिलम के संख्‍या बढ़त जाता। 2010 में 15 गो तअ 2011 में 44 गो ’’ए-एडल्‍ट’’ बनल। अब अंदाजा लगा लीं कि भोजपुरी सिनेमा के कवन राह पकड़ले बा। ई राह भोजपुरी सिनेमा के कहंवा ले जाई।

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भोजपुरी सिनेमा : भटक गई दिशाएँ

भोजपुरी सिनेमा के 50 वर्ष पूरे होने पर एक बार फिर उसकी पड़ताल शुरू हुई है कि #भोजपुरी #सिनेमा ने इन वर्षों में क्या वह मुकाम हासिल कर लिया है जिसकी उम्मीद पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मईया तोहे पीयरी चढ़इबो’ से की गई थी।

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हमार भोजपुरी कहिया ले आठंवी अनुसूची में जगह पाई

#भोजपूरी बोली न समझने वाले इस पोस्ट के कथ्य को यूँ समझें .. भोजपुरी को भाषा का दर्ज़ा देते हुए उसे संविधान की आंठ्वीं अनुसूची में शामिल करने की माँग बहुत वर्षों से लंबित है

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