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भोजपुरी सिनेमा के चित-पट

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up and downs of bhojpuri cinema
up and downs of Bhojpuri Cinema

उतार-चढ़ाव सभे के जिनगी में आवेला। भोजपुरी सिनेमा के जिनगी में भी उतार-चढ़ाव आएल बा। आगे अइबो करी। लेकिन समझदार लोग बितल समय से कुछ सीख लेला कि आगे कवनो अइसन गलती ना होखे, जवना से फेर उहे हाल हो जाए। सुरू में तअ भोजपुरी सिनेमा खूब चमकल, खूब चलल। राजश्री प्रोडक्‍शन के साथे-साथे हिन्‍दी सिनेमा के बड़का-बड़का कलाकार लोग भोजपुरी में आ गइलन। भोजपुरी सिनेमा के पूरा दुनिया में धूम मच गइल। बाकि भोजपुरी के ई सौभाग्‍य दस बारह साल से जादा ना रह पाइल। दाम के बल पर दांव खेलेवाला लोग भोजपुरी सिनेमा के अइसन हाल करअ देलस कि भोजपुरी सिनेमा के कलाकार लोगन के उ बुरा हाल भइल कि अब का कहल जाव। हाल ई रहे कि कब फ़िल्म आवे, कब जावे, केहू के पतो ना चले। ई काल भोजपुरी सिनेमा खातिर अंधकार युग रहे। ई समय 1982 से 2002 तक के रहे। एह समय में साल दु साल में एगो दुगो फिल्‍म बने। लेकिन सोचे के बात ई बा कि आखिर कौन कारण रहे कि 1982 के बाद भोजपुरी में सिनेमा बनल बंद हो गइल? लोग काहे भोजपुरी सिनेमा देखल छोड़ देलक? सब लोग हिन्‍दी सिनेमा के ही दीवाना काहे हो गइल? ई घटना तमिल, तेलगू, कन्‍नड़ आउर मलयालम सिनेमा के साथे काहे ना घटल? एकरा कारण पर जादा दिमाग खपावला के जरूत नइखे। तनिसा दिमाग लगाईं पूरा बात समझ में आ जाई। एकर मुख्‍य कारण रहे भोजपुरी सिनेमा के स्‍तर। समय के साथ भोजपुरी सिनेमा सयान ना भइल, बल्‍कि नादाने रह गइल। भोजपुरी सिनेमा के स्‍तर एतना नीचे गिरा देलक लोग कि गंदा-गंदा सीन आउर गीत देख सुन के लोग उब गइल। भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में नया रचना ना भइल। जइसे तमिल, तेलगू, कन्‍नड़ आउर मलयालम में भइल। आज तक एको भोजपुरी सिनेमा अइसन ना बनल, जवना के रिमेक हिन्‍दी आ दोसरा भासा में बनल होखे। जबकि तमिल, तेलगू, कन्‍नड़ आउर मलयालम सिनेमा के रिमेक दुनिया के कई भाषा में बनल बा। हअ, बाकि भोजपुरी लोकगीत आउर लोकधुन के रिमेक हिन्‍दी सिनेमा में खूब बनल बा। हर राष्‍ट्रीय भा क्षेत्रीय सिनेमा में कुछ अइसन कलाकार होले जेकर मान सम्‍मान पूरा दुनिया करेला। बाकि भोजपुरी सिनेमा में आज तक ऐगो अइसन कलाकार पैदा ना भइले जेकर नाव पूरा दुनिया का भारतो में लोग जानत होखे।

बाजारवाद के समय बा। पइसा हर चीज के पैमाना बन गइल बा।

एही पैमाना पर अब कुछ लो कुछ दाम कमा लेले बा। तनि नाम कमा ले ले बा। 2002 में आइल ‘’ससुरा बड़ा पइसावाला’’ एकर आछा उदाहरण बा। बाकि भोजपुरी सिनेमा के जवन हाल बा उ बड़ले बा। अशुद्ध संवाद, अश्‍लील सीन, दुअर्थी संवाद, हिन्‍दी के कॉपी कहानी, हेरफेर कइल संगीत, अनचलू हीरोइन, हिन्‍दी के रिटायर आ भोजपुरी के चालू किस्‍म के गायक अभिनेता। कुल मिलाके इहे भोजपुरी सिनमा के विश्‍वस्‍तरीय पहचान बन गइल बा। ई पहचान कब डूब जाई भगवान जानस। 1982 के बाद डूबल रहे, फेर उहे हाल मत हो जावो। काहे कि अबही जवन भोजपुरी सिनेमा खाली कमाऊ आउर उबाऊ बनतअ। ई कमाऊ-उबाऊ सांचा कब टूट जाई केहू नइखे जानत। केद्रीय फिल्‍म प्रमाणन बोर्ड के सलाना रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में भोजपुरी में कुल 67 गो फिलम बनल रहे। जवना में कुल 13 गो के ‘‘यू’’ प्रमाण-पत्र मिलल रहे। 39 गो ‘‘यूए’’ आउर 15 गो के ‘‘ए-एडल्‍ट’’ मिलल रहे।

अब ई आंकड़ा 2011 में देखीं। कइसे उतार –चढ़ाव आवता। केंद्रीय फिल्‍म प्रमाणन बोर्ड के सलाना रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में भोजपुरी में कुल 74 गो फिलम बनल। जवना में 8 गो के ‘‘यू’’ प्रमाण-पत्र मिलल। 22 गो के ‘‘यूए’’ कैटगरी मिलल। 44 गो ‘‘ए-एडल्‍ट’’ प्रमाण-पत्र मिलल। अब अंदाजा लगा लीं कि 2010 में 12 गो ‘‘यू’’ और 2011 में 8 गो ‘‘यू’’ प्रमाण-पत्र मिलल। आछा फिलम के संख्‍या घटते आवता और अश्‍लील फिलम के संख्‍या बढ़त जाता। 2010 में 15 गो तअ 2011 में 44 गो ’’ए-एडल्‍ट’’ बनल।

अब अंदाजा लगा लीं कि भोजपुरी सिनेमा के कवन राह पकड़ले बा। ई राह भोजपुरी सिनेमा के कहंवा ले जाई। अंदाजा लगावल मुसकिल नइखे। भगवान मत करअस कि 1982-2002 अंधकार युग वाला समय फेर आ जावो। दक्षिण भारत के फिल्‍मी कलाकार से भोजपुरी सिनेमा के कलाकार लोग के कुछ सिखे के चाहीं, आखिर फिलम सुटिंग करे दक्षिणे भारत नू जाला लोग।