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देश के मदरसों का आधुनिकीकरण

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कल राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार के एजेंडे का एक ख़ाका पेश हुआ, जो कैसे .. अपने अंज़ाम तक पहुंचेगा ये आम बज़ट में साफ़ हो जाने वाला है। कुल मिला कर खाके में छोटी अवधि ,मध्यम और कुछ लंम्बी अवधि की कार्यक्रम योजना देखने में मिली .. जिन सभी पर बजट के बाद ही बात करना भला होगा .. लेकिन मोटे तौर पर इन तीनों समय काल के कामों की उम्र क्रमशः 1 साल , 5 साल और जैसा भाषण में ज़िक्र है .. 20 से अधिक साल मानना उचित होगा। इसमें महँगाई जैसे ज़्वलंत मामले भी शामिल हैं .. हाँ इन छोटी अवधि लेकिन उच्च प्राथिमिकता वाले मामले पर जमीनी काम का असर बज़ट आने के साथ ही दिखना शुरू होगा / होना चाहिए। ध्यान रहे सरकार वस्तुओं के MRP नहीं घटाने जैसे फौरी काम नहीं कर सकती .. उसे इसे कम होने के माहोल की रचना और उपाय करने हैं जो बज़ट में दिखेंगे।

इस सबके बीच .. एक लाइन के ज़िक्र के साथ कार्ययोजना में देश के मदरसों के आधुनिकीकरण की बात कही गयी .. यह बात प्रधानमंत्री जी भी कई बार कहते रहे हैं .. इस पर .. दारुल उलूम, देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी ने कड़ी आपत्ति दर्ज़ कराते हुए जानना चाहा है सरकार इस्लामी मदरसों का किस तरह से आधुनिकीकरण कराना चाहती है। उन्होंने कहा की महामहिम के इस कथन से हिन्दुस्तान के तमाम मदारिस में चिंता की लहर है .. मौलाना ने बताया की देश में दो तरह के मदरसे चलते हैं , जिनमे सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त और दुसरे धार्मिक आज़ादी की बुनियाद पर चलाये जाते हैं जिनपर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता।

मुझे लगता है मौलाना का मूल प्रश्न और चिंता आधुनिकीकरण का प्रकार और इसके दायरे को जानने की है .. और जैसा की परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति के अभिभाषण में मोटा खाका ही पेश होता है .. इसके तफ़सील के लिए हमे प्रतीक्षा करनी चाहिए .. और मौलाना को भी तफ़सील की जरुरत की बात करनी चाहिए न की कड़े ऐतराज़ की .. जो बात अभी हाल साफ़ ही नहीं उस .. ऐतराज कैसा। सरकार काम से पहले योजना सामने लायेगी ही .. यही सहज प्रक्रिया है।

इस तरह के शिक्षण संस्थाओं को पारंपरिक स्वरुप के साथ वर्तमान की जरुरत के लिये तैयार करने का काम स्वागत योग्य है .. सरकार को इसके लिए मदरसों के आधुनिकीकरण के साथ साथ और भी धर्मों के धार्मिक आधार पर स्थापित संस्थानों के आधुनिकीकरण के काम को इसमें शामिल करना चाहिए ऐसा मेरा सोचना है।

Admin
संपादक