सुनहरा पक्षी (कहानी)

सुनहरा पक्षी (कहानी)

सुंदरलाल एक धनी व्यापारी था । उसमें बस एक कमी थी , वह बहुत कामचोर और आलसी था । सुबह देर तक सोना उसे बहुत पसंद था । अपने आलसी स्वभाव के कारण धीरे-धीरे सुंदरलाल की सेहत बिगड़ने लगी । वह पलंग पर पड़ा-पड़ा मोटा हो गया, उससे अब ज्यादा चला फिरा नहीं जाता था । उसने अब अपने सारे काम नौकरों पर छोड़ रखे थे । नौकर अपने मालिक के आलसी स्वभाव से परिचित थे । उन्होंने भी धीरे-धीरे बेईमानी करना शुरू कर दी और उससे सुंदरलाल को व्यापार में नुकसान होने लगा ।

एक दिन सुंदरलाल का मित्र उससे मिलने आया । सुंदरलाल ने अपने मित्र से अपनी बीमारी के बारे में बताया । मित्र होशियार था, वह तुरंत समझ गया कि सुंदरलाल का आलसीपन ही सारी बीमारी की जड़ है । उसने सुंदरलाल से कहा, ‘ तुम्हारी बीमारी को दूर करने का उपाय मैं जानता हूं, पर तुम वह कर नहीं सकते क्योंकि इसके लिए तुम्हें जल्दी उठना पड़ेगा ।’ सुंदरलाल ने कहा कि बीमारी ठीक होने के लिए वह सब कुछ करने को तैयार है । मित्र ने कहा, ‘सुबह-सुबह अक्सर एक सुनहरा पक्षी आता है । तुम अगर उसे देख लो तो तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे ।

सुंदरलाल अगले दिन सुबह-सुबह उठकर सुनहरे पक्षी को खोजने चल पड़ा । रास्ते में उसने देखा कि नौकर उसी के भंडार से अनाज चोरी कर रहे हैं । ग्वाला दूध में पानी मिला रहा है । सुंदरलाल ने अपने सभी नौकरों को डांटा । अगले दिन फिर सुंदरलाल सुनहरे पक्षी की खोज में निकला ।

सुनहरा पक्षी तो मिलना नहीं था ,पर अपने मालिक को रोज आते देख भंडार से चोरी होनी बंद हो गई । सभी नौकर अपना काम ठीक से करने लगे । चलने-फिरने से सुंदर लाल का स्वास्थ्य भी ठीक रहने लगा । कुछ समय बाद सुंदरलाल का मित्र वापस सुन्दरलाल के पास आया । सुंदरलाल ने मित्र से कहा, ‘मैं इतने दिनों से सुनहरे पक्षी को खोज रहा हूं पर वह मुझे दिखाई नहीं दिया ।’

मित्र ने कहा, ‘ तुम्हारा परिश्रम ही वह सुनहरा पक्षी है, तुमने जब से खेतों में जाना शुरू किया है , तुम्हारे यहां चोरी बंद हो गई और तुम्हारा स्वास्थ्य भी ठीक हो गया ।’ मित्र की बात अब सुंदरलाल को समझ में आ गई । उसने उसी दिन के बाद से आलस्य करना छोड़ दिया ।

शिक्षा

सबको अपने काम स्वयं करने चाहिए । परिश्रम और मेहनत से ही काम सफल होते हैं ।

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