ब्रह्मर्षि योगीराज देवरहवा बाबा

ब्रह्मर्षि योगीराज देवरहवा बाबा

आज मैं आप लोगों को पैर से आशीर्वाद देने वाले ,एक बाबा की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत करने जा रहा हूं, जिनका नाम ” ब्रह्मर्षि योगीराज देवरहवा बाबा ” है । देवरहवा बाबा ने देवरिया जनपद के सलेमपुर तहसील में मईल शहर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर सरयू नदी के किनारे एक 12 फुट ऊंचे मचान पर अपना डेरा बनाया था ।

बाबा जी को पहली बार पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में देखा गया था । तब लोगों ने बताया कि इस बाबा का घर “नाथ” नदौली ग्राम, लार रोड था । किंतु उनके कुछ भक्तों ने बताया कि बाबा के माता – पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं प्राप्त है । इनका जन्म कब और कहाँ हुआ, इसका कोई प्रमाण नहीं है । बाबाजी हिमालय में अनेक वर्षों तक अज्ञात रूप में रहकर , साधना की थी और वहां से देवरिया आए थे । कई वर्षों तक देवरिया जिला में निवास करने के कारण , इनका नाम देवरहवा बाबा पड़ गया । बाबा अपने डेरा पर रहकर धर्म-कर्म करने लगे । बाबाजी राम भक्त थे और अपने भक्तों को राम – मंत्र की दीक्षा देते थे । राम और कृष्ण को एक ही मानते थे , इसलिए कृष्ण – मंत्र की दीक्षा भी देते थे ।

बाबा की उम्र विज्ञान के लिए चुनौतीपूर्ण है । उनके उम्र के बारे में अलग – अलग मान्यताएँ बताई गई हैं । कोई बाबा जी को 120 वर्ष , कोई 200 वर्ष , कोई 500 वर्ष, कोई कोई तो 900 वर्ष तक जीवित रहने की बात बताते हैं । योग की ताकत से देवराहा बाबा अधिक समय तक जीवित थे । कुछ भक्तों के द्वारा बताया गया कि बाबा 12 महाकुंभ में स्नान कर चुके थे । महाकुंभ 12 वर्ष के बाद लगता है, इसलिए 12 महाकुंभ का तात्पर्य 144 बर्ष हो गया । बीसवीं सदी के शुरुआत में बाबा के उम्र को लेकर डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि “जब मैं 3 वर्ष का था , तब 1887 में मैंने देवरहवा बाबा का दर्शन किया था । तब भी उनकी उम्र काफी थी ।

यहां तक कि मेरे पिताजी (स्वर्गीय श्री सुदामा यादव) भी अपने जवानी के दिनों में, देवराहा बाबा के चरणों में बैठते थे , तब भी उनकी उम्र काफी थी ।

बाबा जी ने भूख पर विजय प्राप्त कर लिया था, क्योंकि देवराहा बाबा को भोजन करते हुए किसी ने नहीं देखा था । बाबाजी कभी-कभी सिर्फ शहद और दूध पी लेते थे । बाबाजी ब्रह्माण्ड से ऊर्जा लेते थे । बाबाजी 12 फुट ऊँचे लकड़ी के मचान से केवल सुबह के समय स्नान करने के लिए नीचे उतरते थे । जब वह नदी में स्नान करते थे , तो घण्टा दो घण्टा के लिए एक साथ डुबकी लगाते थे । यह उनकी साधना थी । बाबा जी निर्वस्त्र ही रहा करते थे । बाबाजी छोटे – बड़े सभी को दर्शन और आशीर्वाद दिया करते थे ।

बाबाजी के कदमों में नेता , मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे बड़ी-बड़ी हस्तियाँ , फिल्मी – सितारे , बड़े – बड़े अधिकारी झुकते थे , और बाबा अपने पैरों से आशीर्वाद देते थे । जिसके सिर पर बाबा का पैर स्पर्श हो जाता था , उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण हो जाती थी । देवरहवा बाबा के भक्तों में डॉ राजेंद्र प्रसाद , पंडित जवाहरलाल नेहरू , श्रीमती इंदिरा गांधी , जॉर्ज पंचम , सरदार वल्लभभाई पटेल , राजीव गांधी , संजय गांधी , अटल बिहारी वाजपेई , लालू प्रसाद यादव , मुलायम सिंह यादव , पंडित कमलापति त्रिपाठी जैसे बड़े-बड़े नेता शामिल थे । जो कि बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर कामयाबी प्राप्त कर चुके हैं ।

योगीराज बाबा को एक साथ , कई स्थानों पर देखने का दावा किया जाता था । बाबा ने श्री कृष्ण की लीला – भूमि वृंदावन में यमुना नदी के तट पर अपने जीवन के अंतिम समय में 4 वर्षों तक साधना की थी । मंगलवार 19 जून , सन् 1990 को योगिनी एकादशी के पावन दिन पर , अपना प्राण त्यागने वाले इस बाबा के जन्म के बारे में आज भी संशय बना हुआ है ।

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