Spirituality

भारत का श्रापमुक्त गांव माणा का चमत्कार

  •  
  •   
  •   
  •   
  •   
  •  
  •  
  •  
  •  

आज हम आपको भारत तिब्बत सीमा से लगे भारत के अंतिम और अनोखा गांव माणा के बारे में बताने जा रहे हैं । बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है । इस गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र देव के नाम पर रखा गया है ।

मान्यता है कि यह गांव किसी भी श्राप से मुक्त है । यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अपने पापों से मुक्ति मिल जाती है । वहीं आर्थिक तंगी का सामना कर रहे भक्तों को इस स्थिति से निजात मिलती है । इस गांव का संबंध पांडवों से भी है । माना जाता है कि पांडव इसी गांव से होकर स्वर्ग गए थे । यहां की आबादी बहुत कम है यहां करीब 60 घर है जो लकड़ी से बने हुए हैं । यह क्षेत्र साल में करीब 6 महीने तक बर्फ से ढका हुआ रहता है । इस दौरान गांव में रहने वाले लोग पास ही स्थित चमोली जिले के गांवों में रहने के लिए चले जाते हैं । माणा में एक इंटर कॉलेज भी है, जो 6 महीने माणा में जबकि 6 महीने चमोली में चलाया जाता है । अप्रैल-मई महीने में जब यहां बर्फ जम जाती है तो यहां हरियाली निकल जाती है । माणा में मुख्य तौर पर आलू की खेती की जाती है । इसके अलावा माणा गांव अचूक जड़ी – बूटियों के लिए भी प्रसिद्ध है ।

माणा गांव के आस-पास व्यास गुफा , गणेश गुफा , सरस्वती मंदिर , भीमपुल , वसुधारा सहित दर्शनीय स्थल मौजूद है । यहां की एक पौराणिक कथा अनुसार, यहां स्थित गणेश गुफा को लेकर कहा जाता है कि यहां पर भगवान श्री गणेश वेदों की रचना कर रहे थे । इस दौरान सरस्वती नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी , इस कारण सरस्वती नदी से काफी आवाज आ रही थी । आवाज से परेशान होकर भगवान गणेश ने सरस्वती नदी से कहा कि वह कम शोर करें । लेकिन सरस्वती ने उनकी बात नहीं मानी । इससे भगवान गणेश गुस्सा हो गए और उन्होंने सरस्वती नदी को श्राप दिया कि वह इससे आगे किसी को भी दिखाई नहीं देगी । यही कारण है कि आगे चलकर सरस्वती नदी अलकनंदा नदी में मिल जाती है ।

इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव स्वर्ग जाने के लिए यहां पहुंचे तो उन्होंने सरस्वती नदी से रास्ता मांगा । लेकिन सरस्वती नदी ने उनकी बात को अनसुना कर दिया । ऐसे में महाबली भीम ने दो बड़ी शिलायें उठाकर सरस्वती नदी के ऊपर रख दिया जिससे एक पुल का निर्माण हुआ । पांडव तो आगे चले गए और आज तक यह पुल मौजूद है जिसका नाम भीम पुल है । यह गांव बद्रीनाथ से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ऐसे में बद्रीनाथ आने वाले भक्त यहां आसानी से पहुंच सकते हैं । राष्ट्रीय मार्ग नंबर 58 के रास्ते से श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश से माणागांव तक आसानी से पहुंच सकते हैं । माणा गांव से नजदीकी रेलवे स्टेशन लगभग 320 किलोमीटर दूर हरिद्वार और निकटतम हवाई अड्डा 340 किलोमीटर दूर देहरादून में स्थित है ।यह माणा गांव उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक खूबसूरत गांव है । इस गांव को देश का आखिरी गांव या सीमांत गांव भी कहा जाता है । माणागांव में सरस्वती और अलकनंदा नदियों का संगम होता है । यहां कुछ प्राचीन मंदिर और गुफाओं हैं जो कि बहुत ही प्रसिद्ध है ।

आर्थिक रूप से परेशान रहने वाले लोगों के लिए भारत का यह आखिरी गांव किसी चमत्कारी जगह से कम नहीं है । ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान शिव की ऐसी महिमा है कि यहां जो भी आता है ,उसकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाती है। यह गांव , माणा गांव उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है जो बद्रीनाथ से करीब 3 किलोमीटर दूर है। । यहां एक ऐसा मंदिर है जहां महादेव के अंगूठे की पूजा होती है । अगर आप गरीब हैं तो उत्तराखंड के इस गांव में आइए । यहां भगवान शिव की ऐसी महिमा है कि जो भी आता है उसकी गरीबी दूर हो जाती है । यही नहीं इस गांव को श्राप मुक्त जगह का दर्जा प्राप्त है । यह माना जाता है कि यहां आने पर व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त हो जाता है । यह जगह भारत में उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित देश का सबसे अंतिम गांव ‘माणा गांव’ है । जिससे होकर भारत और तिब्बत के बीच वर्षों से व्यापार होता रहा है । पवित्र बद्रीनाथ धाम से तीन किलोमीटर आगे भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित इस गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणि चंद्र मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा था ।

उत्तराखंड संस्कृत अकादमी , हरिद्वार के उपाध्यक्ष पंडित बताते हैं कि इस गांव में आने पर व्यक्ति स्वप्न द्रष्टा हो जाता है । जिसके बाद वह होने वाली घटनाओं के बारे में जान सकता है । पंडित के मुताबिक मणिक शाह नाम का एक व्यापारी था जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था। एक बार व्यापारी की यात्रा के दौरान लुटेरों ने उसका सिर काटकर कत्ल कर दिया । लेकिन इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप करती रही थी, उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया । इसके बाद माणा गांव में मणिभद्र की पूजा की जाने लगी । शिव ने मणिक शाह को वरदान दिया कि माणा गांव आने पर व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाएगी । यहां के पंडित बताते हैं कि मणिभद्र भगवान से बृहस्पति को पैसे के लिए प्रार्थना की जाए तो अगले बृहस्पतिवार तक पैसे मिल जाता है ।

इसी गांव में गणेश जी व्यास ऋषि के कहने पर महाभारत की रचना की थी । यही नहीं महाभारत युद्ध के समाप्त होने पर पांडव द्रोपती सहित इसी गांव से होकर ही स्वर्ग को जाने वाली स्वर्गरोहिणी सीढ़ी तक गए थे ।