हिंदू पौराणिक ग्रंथों में बन्दर रूप की चमत्कारी  शक्तियां

हिंदू पौराणिक ग्रंथों में बन्दर रूप की चमत्कारी शक्तियां

हिंदी पौराणिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि बन्दर रूप में दिव्य शक्तियां हुआ करती थी । यह बंदर अलौकिक शक्ति के धनी थे रामायण में उल्लेख मिलता है कि किष्किंधा नरेश बालि अपने सामने युद्ध के लिए मौजूद व्यक्ति की आधी शक्ति को अपने अंदर समाहित कर सकता था ।वहीं बालि का पुत्र अंगद एक बार जहां पैर रख देते थे , उसे हिलाने की हिम्मत कोई भी नहीं कर सकता था । वहीं हनुमान जी की अलौकिक शक्तियों से हम सभी परिचित हैं । त्रेता युग में बंदर इंसान की तरह ही थे । इसका सबसे विश्वसनीय प्रमाण वाल्मीकि रामायण में मौजूद किष्किंधा कांड में मिलता है । इस कांड में बालि और सुग्रीव की कथा लिखी गई है ।

वहीं भगवान शिव का रूद्रावतार, हनुमान जी बानर रूप में ही हुआ था । हनुमान जी के पिता सुमेर पर्वत पर रहते थे । वह बानर राज थे । जिनका नाम राजा केसरी था । हनुमान जी की माता का नाम अंजनी था । त्रेता युग में यह दो ही तथ्य मिलते हैं, जिसमें राजा बानर थे । इनकी अपनी वानर सेना थी । इन बंदरों को वनचर नाम से भी बुलाया जाता था , क्योंकि वह वन में रहते थे । इंसानों की तरह बोलने वाले बंदरों का जिक्र हिंदू पौराणिक ग्रंथ रामायण और महाभारत में मिलता है । वे बानर ही थे , जिन्होंने राम- रावण युद्ध में मुख्य भूमिका निभाई थी ।

द्वापर युग यानि महाभारत काल में हनुमान जी का उल्लेख दो बार किया गया है । पहला महाभारत युद्ध में अर्जुन के रथ के झंडे पर और दूसरी बात भीम के अहंकार का अंत करने के लिए जब हनुमान जी एक वन में उनकी परीक्षा लेते हैं । उस समय तक बानर ऋषिकेश , किष्किंधाऔर दारूकावन में निवास करते थे । इस बात का उल्लेख पुराणों में मिलता है ।

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