अंडों की खोज से चंटू -बंटू के उड़ने तक

अंडों की खोज से चंटू -बंटू के उड़ने तक

यकीन मानिये .. जब हमारे आस पास कुछ ख़ास सा होता नहीं दीखता .. तब भी .. बहुत कुछ ख़ास हो रहा होता है। बीते 17-18 अप्रैल को मेरे किचन के खराब पड़े एग्जॉस्ट फैन का उपयोग .. साँवले कबूतरों के एक जोड़े ने दो नये जीवन को इस दुनिया में लाने के लिए किया।

बीते कल यानी 3 जून को इस दंपति ने एक खुशहाल परिवार के रूप में अपने दो बच्चों के साथ किचन को अलविदा कह दिया।

माँ .. को जब पहली बार किचन में इन अंडों के होने का पता चला तो उनका कहना था .. हे भगवान .. किचन में अंडा .. फिर .. तुरत बोलीं .. रहने देना इसे , कुछ करने की जरुरत नहीं। इन पूरे दिनों में डेढ़ महीनों के दौरान नये जीवन के साथ जुड़े कई असुविधाओं का सामना हुआ .. तिनके , खर पतवार .. बीट , गंदगी .. और बाद के कुछ दिनों में तो बच्चो के खाने के लिए लाये गए कीट और अन्य छोटे मृत जीव भी उस ऊपरी रैक से होते हुए पूरे किचन तक फैलते रहे .. घर ने अपने किचन के बचाव का इंतेज़ाम किया और जीवन पलता रहा।

17 अप्रैल को आगमन पहले जीवन का
17 अप्रैल को आगमन पहले जीवन का
18 अप्रैल को जीवन ने अपने को दो किया।
18 अप्रैल को जीवन ने अपने को दो किया।
ठीक अट्ठारह दिन बाद यानी 6 मई को जीवन ने शरीर रूप लिया।
ठीक अट्ठारह दिन बाद यानी 6 मई को जीवन ने शरीर रूप लिया।
जिम्मेदार दंपति .. हमेशा पहरे पर तैनात।
जिम्मेदार दंपति .. हमेशा पहरे पर तैनात।
20 मई .. बच्चे अब कबूतर से दिखने लगे।
20 मई .. बच्चे अब कबूतर से दिखने लगे।
ह तस्वीर 30 मई की है जब बच्चों ने आस पास घूमना शुरू कर लिया।
यह तस्वीर 30 मई की है जब बच्चों ने आस पास घूमना शुरू कर लिया।

कल यानी 3 जून को अपने जन्मस्थान को अलविदा कह बच्चों में से एक अपने माता / पिता के साथ। दूसरा दिखा लेकिन कैमरे में कैद होने को तैयार नहीं था।

सुबह की चाय बनाते हुए अब इनकी चूँ -चूँ .. नहीं सुनाई देगी .. जिसे मुझे आदत सी हो गयी थी।

सभी चित्र : निर्भीक फोटो पत्रकार .. बिटिया आर्या के सौजन्य से .. जिन्होंने अंडों की खोज से चंटू -बंटू (ये नाम दिया है उन्होंने दोनों बच्चों को) के कल उड़ने तक रोज़ाना रिपोर्टिंग किया और अब हर साल 6 मई को इन शैतान ट्विन्स का हैप्पी बर्थ डे मनाने की तैयारी में हैं 

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