शिव – पार्वती के विवाह से पहले पूजे गए थे गणेश

शिव – पार्वती के विवाह से पहले पूजे गए थे गणेश

हिंदू संस्कृति और पूजा में भगवान श्री गणेश जी को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है । गणेश जी भगवान शिव- पार्वती के पुत्र हैं , लेकिन शिव- पार्वती के विवाह से पहले भी गणेश जी की पूजा हुई थी ।

कुछ लोग वेदों एवं पुराणों के विवरण को न समझ पाने के कारण इस पर शंका करते हैं कि गणेश जी अगर शिव पुत्र हैं, तो फिर अपने विवाह में शिव- पार्वती ने उनका पूजन कैसे किया ? इसको लेकर कई लोग संशय में रहते हैं । लेकिन विवाह के समय ब्रह्मबेत्ता मुनियों के निर्देश पर शिव- पार्वती ने गणपति की पूजा संपन्न की । इसलिए कोई व्यक्ति संशय न करें , क्योंकि देवता (गणपति) अनादि होते हैं ।

इस शंका का समाधान तुलसीदास जी करते हैं ——

मुनि अनुशासन गणपति हि पूजेहुं शंभु भवानि ।

कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि ।।

इसका अर्थ यह है कि भगवान गणपति किसी के पुत्र नहीं हैं । वे अज, अनादि व अनंत हैं ।

भगवान शिव के पुत्र जो गणेश हुए , वह तो उन गणपति के अवतार हैं जिनका उल्लेख वेदों में पाया जाता है । गणेश जी वैदिक देवता हैं । परंतु इनका नाम वेदों में गणेश न होकर ‘गणपति ‘ या ‘ब्रह्मणस्पति है । जो वेदों में ब्रह्मणस्पति हैं , उन्हीं का नाम पुराणों में गणेश है । ऋग्वेद एवं यजुर्वेद के मंत्रों में भी गणेश जी के उपर्युक्त नाम देखे जा सकते हैं ।

विघ्नहर्ता हैं भगवान गणेश!

भगवान गणेश जहां विघ्नहर्ता हैं, वहीं रिद्धि और सिद्धि से विवेक और समृद्धि मिलती है । शुभ और लाभ घर में सुख सौभाग्य लाते हैं और समृद्धि को स्थाई और सुरक्षित बनाते हैं । सुख सौभाग्य की चाहत पूरी करने के लिए बुधवार को गणेश जी के पूजन के साथ रिद्धि- सिद्धि व लाभ – क्षेम की पूजा भी विशेष मंत्रोच्चारण से करना शुभ माना जाता है । इसके लिए सुबह या शाम को स्नानादि के पश्चात रिद्धि- सिद्धि सहित गणेश जी की मूर्ति को स्वच्छ या पवित्र जल से स्नान करवाएं । लाभ – क्षेम के स्वरूप दो स्वास्तिक बनाएं , गणेश जी व परिवार को केसरिया , चंदन , सिंदूर , अक्षत और दूर्वा अर्पित कर सकते हैं ।

गणेश मंत्र:-

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ: । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा ।।

शुभ लाभ मंत्र :-

ऊं श्री गं सौभाग्य गणपतये । वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः ।।

भगवान श्री गणेश के इस मंत्र में ‘ऊं , श्रीं , गं ‘ बीज मंत्र है , जो परमपिता परमात्मा , मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश के बीज मंत्र हैं ।

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