यहां अवतरित हुई सीता यहीं पर जन्मीं द्रौपदी

यहां अवतरित हुई सीता यहीं पर जन्मीं द्रौपदी

पटना से 105 किलोमीटर तथा मुजफ्फरपुर से 53 किलोमीटर दूर सीतामढ़ी , पौराणिक आख्यानों में त्रेतायुगीन शहर के रूप में वर्णित है । त्रेता युग में जहां राजा जनक की पुत्री तथा भगवान राम की पत्नी देवी सीता का जन्म पुनौरा में हुआ था । यहां के लोगों का विश्वास है कि सीतामढ़ी के पास स्थित देवकुली (ढेकुली) में द्रुपद पुत्री तथा पांडव पत्नी द्रोपदी का भी जन्म हुआ था । सीता जी के जन्म के कारण इस नगर का नाम पहले सीतामढ़ी , फिर सीतामही और कालांतर में सीतामढ़ी पड़ा । प्राचीन काल में सीतामढ़ी तिरहुत का अंग रहा है ।

पौराणिक महत्व

वृहद विष्णु पुराण के अनुसार सम्राट जनक की हल-कर्षण-यज्ञ-भूमि तथा उर्बिजा सीता के अवतीर्ण होने का स्थान है । लक्षमना (वर्तमान में लखनदेई) नदी के तट पर उस यज्ञ का अनुष्ठान एवं संपादन बताया जाता है । हल-कर्षण- यज्ञ के परिणाम स्वरुप भूमिसुता सीता धरा धाम पर अवतीर्ण हुई । साथ ही आकाश मेघाच्छन्न होकर मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गयी । कहा जाता है कि जहां पर सीता की वर्षा से रक्षा हेतु मड़ई बनाई गई , उस स्थान का नाम पहले सीतामड़ई , कालांतर में सीतामही और फिर सीतामढ़ी पड़ा ।यहीं पास में पुनौरा ग्राम है जहां रामायण काल के पुंडरीक ऋषि निवास करते थे । कुछ लोग इसे भी सीता के अवतरण भूमि मानते हैं । परंतु ये सभी स्थानीय अनुश्रुतियां हैं । सीतामढ़ी तथा पुनौरा जहां है वहां रामायण काल में घनघोर जंगल था । वृहद विष्णु पुराण में जनकपुर नेपाल से मापकर वर्तमान जानकी स्थान वाली जगह को ही राजा जनक की हल-कर्षण- भूमि बताया जाता है । सीतामढ़ी में उर्बिजा जानकी के नाम पर प्रतिवर्ष दो बार एक रामनवमी और दूसरी बार विवाह पंचमी के अवसर पर विशाल पशु मेला लगता है । जिससे वहां के जानकी स्थान की ख्याति और भी अधिक हो गई है ।

श्री राम चरितमानस के बालकांड में ऐसा उल्लेख है कि राजकुमारों के बड़े होने पर आश्रम की राक्षसों से रक्षा हेतु ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांग कर अपने साथ ले गए । राम ने ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों को मार डाला , और मारीच को बिना फल वाले बाढ़ से मारकर समुद्र के पार भेज दिया । उधर लक्ष्मण ने राक्षसों की सारी सेना का संहार कर डाला ।

राम सीता के विवाह के उपलक्ष में अगहन विवाह पंचमी को सीतामढ़ी में प्रतिवर्ष सोनपुर के बाद एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है । इसी प्रकार जामाता राम के सम्मान में भी यहां चैत्र रामनवमी को बड़ा पशु मेला लगता है ।

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