यहाँ भोलेनाथ को चढ़ाई जाती है सिगरेट, विश्वास न हो तो एक बार जरुर दर्शन करें

यहाँ भोलेनाथ को चढ़ाई जाती है सिगरेट, विश्वास न हो तो एक बार जरुर दर्शन करें

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला को प्रदेश का प्रवेश द्वार माना जाता है , तथा अर्की जिला सोलन की एक प्रमुख तहसील है । स्वतंत्रता पूर्व अर्की बाघल रियासत के नाम से प्रसिद्ध थी । उपमंडल में प्राचीन मंदिरों व गुफाओं की भरमार है । यहां नगर के शीश पर पवित्र लुटरु महादेव गुफा स्थित है । लुटरु महादेव रूद्र रूप शिव जी की आदि गुफा है । इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर शिवलिंग को भक्त सिगरेट पिलाते हैं ।

सुनने में भले ही अजीब लगे मगर लोगों का मानना है कि शिवलिंग के रूप में विराजमान भोले बाबा सिगरेट पीते हैं । आमतौर पर देवस्थानों पर सिगरेट व नशे की अध्र्य बस्तुएं ले जाने पर रोक होती है, लेकिन यहां आकर शिवलिंग को सिगरेट पिलाई जाती है । आमतौर पर शिवलिंग की सतह पतली होती है, मगर इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की सतह में काफी गड्ढे बने हुए हैं । लोग इन्हीं गड्ढों में सिगरेट फंसा देते हैं । कुछ ही देर में सिगरेट खुद-ब-खुद ऐसे सुलगने लगती है , मानो कोई कश लगा रहा हो ।

डेरा बाबा लुटरू ऊना की तरह यह भी रूद्र शिव का पावन स्थल है । लुटरू शब्द रुद्र , रूदर , लुदर , लुदरू और लुटरू में भाषा परिवर्तन से अस्तित्व में आया । प्राचीन लुटरु महादेव गुफा एक प्राकृतिक चमत्कार की तरह है । आग्नेय चट्टानों से निर्मित इस गुफा की लंबाई पूर्व से पश्चिम की तरफ लगभग 25 फुट तथा उत्तर से दक्षिण की ओर 42 फुट है । गुफा की ऊंचाई तल से 6 फुट से 30 फुट तक है । यह इस प्रकार स्वनिर्मित है कि वर्षा काल में पानी की बौछारें आसमान से इसमें प्रवेश नहीं कर सकती । पौराणिक मान्यता के अनुसार इनसे दूध की धारा बहती थी , लेकिन अब वर्तमान में इन प्राकृतिक थनों से पानी की कुछ बूंदें टपकती रहती हैं । लुटरू गुफा को भगवान परशुराम की कर्मस्थली भी कहा जाता है । सहस्त्रबाहु को मारने के बाद जब परशुराम पिता के आदेश से शिव की आराधना करने हिमालय में आए थे तो उनके चरण यहां पड़े थे ।

पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा भगीरथ के प्रयत्न से गंगा स्वर्ग में शिव जी की जटाओं में सिमटी थी , तो इसके छींटे यहां लुटरू धार पर भी पड़े थे , जो आज भी शकनी गंगा के रूप में विद्यमान है , तथा यहीं से अर्की नगर के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है ।

1805 ईस्वी में जब बाघल रियासत पर आक्रमण किया गया था तो गुफा को उस समय उन्होंने अपना आवास बनाया था । गोरखा सेनापति अमर सिंह राणा ने अर्की नगर को बाघल रियासत की राजधानी बनाया था ।

हर वर्ष महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां विशाल मेला लगता है ।

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