इसलिए श्री हरि के हैं चार हाथ

इसलिए श्री हरि के हैं चार हाथ

त्रिदेवों में सबसे बड़े भगवान शिव के तीन नेत्र हैं । सर्वप्रथम उन्होंने ही अपनी अंतर्दृष्टि से श्रीहरि को जन्म दिया । क्षीरसागर निवासी विष्णु जी की नाभि से ब्रह्मा जी ने जन्म लिया । जिनके चार सिर (जिन्हें चारों वेदों के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है) और चार हाथ (जो की बुद्धि ,दया ,मस्तिष्क और आत्मविश्वास को दर्शाते हैं) हैं । इन पौराणिक कथाओं का विस्तार से उल्लेख पुराणों में मिलता है ।

भगवान विष्णु यानी श्री हरि के चार हाथ उनकी शक्तिशाली और सर्व व्यापक प्रकृति का संकेत देते हैं । उनके सामने के दो हाथ भौतिक अस्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और पीठ पर दो हाथ आध्यात्मिक दुनिया में अपनी उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं ।

विष्णु के चार हाथ अंतरिक्ष की चारों दिशाओं पर प्रभुत्व व्यक्त करते हैं , और मानव जीवन के चार चरणों और चार आश्रमों के रूप का प्रतीक है । जो कि क्रमश: ज्ञान के लिए खोज (ब्रम्हचर्य) , पारिवारिक जीवन (गृहस्थ) , वन में वापसी (वानप्रस्थ) , और सन्यास का प्रतीक हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *