हिंदू परंपराएं और उनके फायदे

हिंदू परंपराएं और उनके फायदे

भारत देश परंपराओं का देश है । परंपराओं और रीति-रिवाजों के कारण ही यह़ देश दुनिया में अलग महत्वपूर्ण स्थान रखता है । हमारे ऋषियों – मुनियों और पूर्वजों ने गहन अध्ययन करके मनुष्य के लाभ के लिए रीति – रिवाज और परंपराओं की शुरुआत किया था । यह हमें स्वास्थ्य संबंधी बहुत सी समस्याओं और बीमारियों से बचाती है । इसे वैज्ञानिक भी प्रमाणित कर चुके हैं ।

यह परंपराएं धर्म से जुड़ी दिखाई देती हैं , लेकिन इनके वैज्ञानिक कारण भी हैं । जो लोग इन परंपराओं को अपने जीवन में उतारते हैं , वह स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों से बचे रहते हैं । इन परंपराओं का पालन अधिकतर परिवारों में किया जाता है ।

यह परंपराएं एवं रीति रिवाज निम्न प्रकार से है :–

(१)-एक ही गोत्र में शादी नहीं करना :– धार्मिक मान्यता के अनुसार एक समान गोत्र में या खानदान में शादी नहीं करनी चाहिए । एक ही गोत्र में शादी करने से स्त्री पुरुष भाई-बहन कहलाते हैं । क्योंकि उनके पूर्वज एक ही थे । इसलिए एक गोत्र में शादी नहीं की जाती है । क्योंकि समान गोत्र का होने के कारण चाहे वह भाई बहन हो या न हो ,लेकिन उनके गुणसूत्र समान होते हैं । इसलिए अगर एक गोत्र में शादी होती है , तो उनके बच्चे अनुवांशिक बीमारियों के साथ पैदा होंगे । बच्चों में अनुवांशिक दोष जैसे – मानसिक कमजोरी , अपंगता आदि गंभीर रोग जन्मजात ही पाए जाते हैं । बच्चों की विचारधारा व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं आता है । इसलिए अलग-अलग गोत्र में शादी करने से स्त्री पुरुष के गुणसूत्र , जींस आपस में नई मिलने के कारण बच्चों मैं अनुवांशिक बीमारी नहीं होती है ।

(२) कर्ण छेदन :– कान छिदवाना बहुत पुरानी परंपरा है । पुराने समय में ऋषि – मुनि , राजा – महाराजा कानों में कुंडल पहनते थे । आजकल पुरुषों में कम , किंतु स्त्रियां श्रृंगार करने के लिए नाक और कान छिदवाती हैं । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कान छिदवाना स्त्री व पुरुष दोनों के लिए लाभदायक होता है । कान में एक नस होती है जो दिमाग तक जाती है । कान छिदवाने से इस नस में रक्त संचार नियंत्रित रहता है , जिससे सोचने की शक्ति मिलती है तथा बोलने में होने वाली समस्या खत्म हो जाती है ।

(३) माथे पर तिलक :– हिंदू धर्म के अनुसार धार्मिक अवसरों , शादी विवाह , त्यौहार या पूजा पाठ के समय चंदन कुमकुम या सिंदूर से माथे पर तिलक लगाया जाता है । क्योंकि माथे पर तिलक लगाना शुभ माना गया है । वैज्ञानिक तर्क यह है कि दोनों आंखों के बीच में एक चक्र होता है , इसी चक्र पर तिलक लगाया जाता है । तो उस चक्र पर एक नस होती है , जिससे पूरे चेहरे पर रक्त का संचार होता है । जब माथे पर तिलक लगाया जाता है तो उस चक्र पर अंगुली या अंगूठा से दबाव बनता है और वह सक्रिय हो जाती है । और रक्त संचार अच्छी मात्रा में करने लगती है । ऊर्जा का संचार होता है , एकाग्रता बढ़ती है तथा चेहरे पर रौनक आती है ।

(४) बैठकर भोजन करना :– पुरानी परंपरा के अनुसार सभी लोग जमीन पर आसन बिछाकर , उस पर बैठकर भोजन करते थे । इसका वैज्ञानिक कारण भी है कि पालथी मारकर बैठना एक योगासन है । इस योग क्रिया से पाचन क्रिया अच्छी रहती है । मोटापा , अपच , कव्ज , एसिडिटी आदि पेट की बीमारियां नहीं होती हैं । तथा मन शांत रहता है ।

(५) शुरुआत तीखे से , अन्त मीठे से :– हिंदू परंपरा के अनुसार धार्मिक अवसरों या शुभ अवसरों पर शुरुआत में तीखा खाना खाया जाता है और बाद में मीठा खाना खाया जाता है । एक कहावत है कि ” खाने के बाद , कुछ मीठा हो जाए ” । विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार शुरुआत में तीखा भोजन करने के बाद पेट में पाचन तत्व तथा अम्ल सक्रिय हो जाते हैं , जिससे पाचन तंत्र तेज हो जाता है । अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीब्रता कम हो जाती है । जिससे पेट में जलन या एसिडिटी नहीं होती है ।

(६)हाथ जोड़कर नमस्ते :– हिंदू परंपरा तथा भारतीय संस्कृति के अनुसार किसी से मिलने पर हाथ जोड़कर प्रणाम किया जाता है । पूजा – पाठ के समय हाथ जोड़ते हैं । हाथ जोड़ना सम्मान का प्रतीक है । हाथ जोड़ने पर हाथ की सभी अंगुलियों के सिरे एक दूसरे से मिलते हैं , जिससे उन पर दबाव पड़ता है । यह दबाव एक्यूप्रेशर का काम करता है । जिसका सीधा असर हमारी आंखों , कानो तथा दिमाग पर पड़ता है ।

(७) पीपल की पूजा :– धार्मिक मान्यता के अनुसार रोजाना पीपल की पूजा करने पर घर में सुख समृद्धि बढ़ती है तथा लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है । शास्त्रों के अनुसार पीपल पर साक्षात ब्रह्मा विष्णु और शिव निवास करते हैं । पीपल पर लक्ष्मी और पितरों का वास भी बताया गया है । इसलिए पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है । इस पूजा से शनि के प्रभाव से मुक्ति भी मिलती है । पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ते हैं , जो कि मनुष्य के लिए प्राण वायु है । पीपल का वृक्ष गर्मी में ठंडा और ठंडक में गर्मी देती है । इस वृक्ष का तना , पत्ता , छाल और फल हर भाग दवा के काम आता है ।

(८) दक्षिण या पूर्व में सिर करके सोना :– परंपरा के अनुसार सोते समय सिरको दक्षिण या पूर्व की ओर करके सोना चाहिए । यदि ऐसा नहीं करते हैं तो बुरे सपने आते हैं और अशुभ होता है । इसका वैज्ञानिक तर्क यह है जब हम उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोते हैं , तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों के सीध में आ जाता है । शरीर में मौजूद आयरन यानि लोहा दिमाग की ओर प्रभावित होने लगता है , इससे दिमाग से संबंधित कोई बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर भी असंतुलित हो सकता है । इसलिए दक्षिण दिशा या पूर्व दिशा में सिर करके सोने से यह परेशानी नहीं होती है ।

(९) सूर्य पूजा :– धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव को जल चढ़ाने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं । सूर्य का प्रकोप नहीं होता है । और उनके राशि दोष समाप्त हो जाते हैं । सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें अधिक तेज नहीं होती हैं । और वह किरणें शरीर के लिए फायदेमंद होती हैं ।जब जल चढ़ाते हैं तो जल के अंदर से सूर्य की किरणें छनकर हमारे आंखों और शरीर पर पड़ती हैं , जिससे आंखों की रोशनी तेज होती है । तथा पीलिया , क्षय रोग , दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है । सूर्य की किरणों से विटामिन – डी मिलती है और शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है ।

(१०) शिखा :– पुराने समय में सभी ऋषि – मुनि सिर पर शिखा यानी चोटी रखते थे । आज भी कई लोग रखते हैं । मान्यता है कि जिस जगह पर चोटी रखी जाती है उस जगह दिमाग की सारी नसों का केंद्र होता है । यहां चोटी रखी जाती है तो दिमाग स्थिर रहता है । क्रोध नहीं आता है और सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है । मानसिक मजबूती मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है ।

(११) व्रत रखना :– हिंदू धर्म में सभी मनुष्य अपनी – अपनी श्रद्धा एवं आस्था के अनुसार अलग – अलग देवी देवताओं को मानते हैं , उनकी पूजा करते हैं । और अपने देवी – देवताओं के लिए व्रत रखते हैं । ऐसा मानना है कि व्रत रखने से देवी – देवता प्रसन्न होते हैं और कष्टों परेशानियों को दूर करके मनोकामना को पूर्ण करते हैं । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सप्ताह में एक बार व्रत रखने से पाचन क्रिया को आराम मिलता है । इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है । कैंसर , मधुमेह तथा हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम रहता है ।

(१२) चरण स्पर्श :– चरण स्पर्श करना , भारतीय संस्कारों का एक हिस्सा है । संस्कार बच्चों को सिखाया जाता है कि अपने से बड़ों का आदर- सम्मान करें ।मनुष्य के शरीर में मस्तिष्क से लेकर पैरों तक लगातार ऊर्जा संचालित होती है । जब हम किसी का पैर छूते हैं तो उस व्यक्ति के पैरों से रोती हुई उर्जा हमारे शरीर में तथा हमारे हाथों से होते हुए उसके शरीर में पहुंचती है । और वह व्यक्ति आशीर्वाद देते समय हमारे शरीर पर हाथ रखता है तो दोबारा उसके हाथों से होती हुई हमारे शरीर में आती है । इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है । तथा मन को शांति मिलती है ।

(१३) मांग में सिंदूर :– विवाहित महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर लगाना अनिवार्य परंपरा है । इस संबंध में तर्क यह है कि सिंदूर लगाने से पति की उम्र लंबी होती है । सिंदूर में हल्दी , चूना और पारा होता है । तीनों का मिश्रण शरीर के रक्त चाप को नियंत्रित करता है , इससे मानसिक तनाव भी कम होता है ।

(१४) तुलसी पूजा :– हिंदू धर्म के अनुसार तुलसी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तुलसी का पेड़ वातावरण को शुद्ध करता है । तुलसी मच्छरों और कीटाणुओं को दूर भगाता है , जिससे वायु शुद्ध होती है । तुलसी में रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं । तुलसी की पत्तियों का सेवन करने से कई बीमारियां दूर हो जाती है ।

(१५) मासिक धर्म :– स्त्रियों को मासिक धर्म के दिनों में मन्दिर या पूजा पाठ , किसी धार्मिक कार्य में भाग लेना मना है । मासिक धर्म में स्त्रियों को अपवित्र माना गया है । वैज्ञानिक रूप से भी मासिक धर्म के समय महिलाओं के शरीर से गंदगी निकलती है , एक विशेष प्रकार की तरंगे निकलती हैं जो दूसरों के लिए हानिकारक हैं । उनसे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है । इसलिए इन महिलाओं को सबसे दूर रखा जाता है ।

(१६) कलावा बांधना :– धार्मिक कार्यों या शुभ अवसरों पर पूजा पाठ में हाथ में कलावा बांधना (मौली धागा ) शुभ होता है , देवी देवता प्रसन्न होते हैं । वैज्ञानिक रूप से दाएं हाथ की कलाई मैं एक ऐसी नस होती है जो दिमाग तक जाती है । उस कलाई पर कलावा बांधने से नसों पर दबाव पड़ता है । जिससे दिमाग तक , रक्त संचार सुचारू रूप से होता है , और दिमाग शांत रहता है । कलावा वात , कफ , तथा पित्तरोग जैसे दोषों को भी कम करता है ।

(१७) स्नान के बाद भोजन :– शास्त्रों के अनुसार स्नान करके पवित्र होकर ही भोजन करना चाहिए । बिना स्नान भोजन करना पशुओं के समान है और अपवित्र माना गया है । देवी – देवता नाराज हो जाते हैं ।वैज्ञानिक रूप से स्नान करने से शरीर की गंदगी निकल जाती है । शरीर में नई ताजगी और स्फूर्ति आती है , भूख लगती है और भोजन का रस शरीर के लिए पुष्ट वर्धक होता है।

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